सिरोही

ऑनलाइन गेम्स की लत सुधारने को शिक्षा विभाग की अनूठी पहल, नो बैड डे पर चलेंगे शतरंज की चाल

- स्कूली बच्चे बनेंगे शतरंज के खिलाड़ी, नो बैड डे के तहत हर माह के तीसरे शनिवार को होगी गतिविधियां

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सिरोही. सरकारी विद्यालय में शतरंज का खेल खेलते विद्यार्थी।

सिरोही. ऑनलाइन गेम के भंवरजाल में फंसती नई पीढ़ी को इससे उबारने के साथ उनमें मानसिक एवं नेतृत्व क्षमता का विकास करने के लिए सरकारी विद्यालयों में अब अनूठी पहल की गई है। शिक्षा विभाग की ओर से प्रत्येक माह के तीसरे शनिवार को विद्यार्थियों को शतरंज का खेल खिलाया जाएगा। शतरंज की चौसर पर मोहरे चलाने में निपुणता के लिए बच्चों को तैयार किया जाएगा। अधिकाधिक बच्चों को शतरंज खेल से जोड़ा जाएगा। इसकी शुरुआत इंदिरा गांधी की जयंती के अवसर पर शनिवार से की गई। नौ बैड डे के तहत हर माह के तीसरे शनिवार को यह खेल आयोजित होगा। इसे चैस इन स्कूल कार्यक्रम नाम दिया गया है।

बच्चों में नेतृत्व क्षमता का होगा विकास

स्कूली बच्चों को शतरंज खिलाने का निर्णय उनके मस्तिष्क के समुचित विकास के लिए लिया गया है। इतना ही नहीं सरकार की मंशा है कि अधिक से अधिक बच्चे ग्रैंड मास्टर बने। टीवी, मोबाइल और वीडियो गेम के जाल में फंसते जा रहे बच्चों का मानसिक विकास के लिए और विद्यार्थियों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

ये हैं मुख्य उद्देश्य...

- ऑनलाइन गेम से बच्चों की दूरी बनाना

- शतरंज के माध्यम से बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत करना

- शतरंज की चालों से नेतृत्व क्षमता का गुण विकसित करना

- बच्चों को शह. मात के खेल में पारंगत करना

इन्होंने बताया

नो बैड डे के तहत हर माह के तीसरे शनिवार को शतरंज की गतिविधियां होगी। जिससे बच्चों में मानसिक एवं नेतृत्व क्षमता का विकास होगा।

- मांगीलाल गर्ग, एडीपीसी, समग्र शिक्षा विभाग, सिरोही

Published on:
20 Nov 2022 01:22 pm
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