सिरोही

राजस्थान के इस जिले के किसानों की किस्मत बदल सकती है यह फसल, अब भजनलाल सरकार से ऐसी बड़ी मांग

सिरोही जिले में अरण्डी की भरपूर पैदावार हो रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर बिक्री और प्रसंस्करण की व्यवस्था नहीं होने से किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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Feb 04, 2026
एक खेत खड़ी अरण्डी की फसल। फोटो- पत्रिका

सिरोही। जिले की प्रमुख फसल अरण्डी है और इसकी भरपूर पैदावार हो रही है, लेकिन इसका स्थानीय स्तर पर कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। जिले में न तो इस फसल की बिक्री की समुचित व्यवस्था है और न ही प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित हैं। ऐसे में जिले में उत्पादित पूरी पैदावार गुजरात भेजी जा रही है।

अरण्डी से संबंधित प्रसंस्करण इकाइयां भी गुजरात में ही स्थित हैं। इस कारण उत्पादन राजस्थान में हो रहा है और लाभ गुजरात को मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जिले में ही अरण्डी आधारित प्रसंस्करण यूनिट स्थापित की जाए तो किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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सरकार ध्यान दें तो किसानों की बढ़े आय

यदि सिरोही जिले में कृषि मण्डी खुले या प्रसंस्करण यूनिट स्थापित हों तो किसानों की आय बढ़ सकती है और लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, लेकिन विडम्बना यह है कि सरकार कृषि क्षेत्र के विकास के दावे तो खूब कर रही है, जबकि यहां की प्रमुख फसलों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्हें अपनी जिंस गुजरात जाकर बेचनी पड़ती है, जिसमें काफी आर्थिक भार वहन करना पड़ता है। ऐसे में कमाई के बजाय खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है।

सौंदर्य प्रसाधन से लेकर दवाइयों तक अरण्डी की मांग

अरण्डी के तेल की बाजार में काफी मांग है। यह तेल विभिन्न उद्योगों में व्यापक रूप से उपयोग होता है। अरण्डी तेल लुब्रिकेंट्स, कोटिंग्स, सौन्दर्य प्रसाधन, फार्मास्यूटिकल्स, बायोडीजल और प्लास्टिक निर्माण में काम आता है। ऐसे में यदि सरकार प्रयास करे तो इस तरह के उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सकता है। सिरोही में प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना से न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

50 हजार हैक्टेयर में लहलहा रही फसल

जिले में वर्तमान में करीब 50 हजार हैक्टेयर भूमि पर अरण्डी की फसल लहलहा रही है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्थानीय स्तर पर इस फसल को बेचने तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए गुजरात जाना पड़ता है, जिससे उन्हें दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है। रेवदर ब्लॉक में अरण्डी की खेती सबसे अधिक की जाती है।

अरण्डी आधारित प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा मिले

केवीके सिरोही के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एस. के. खींची ने बताया कि जिले में लगभग 45 से 50 हजार हैक्टेयर भूमि पर अरण्डी की खेती की जा रही है। अरण्डी का तेल मुख्य रूप से उद्योगों में उपयोग होता है। इसका प्रयोग लुब्रिकेंट्स, कोटिंग्स, सौन्दर्य प्रसाधन, फार्मास्यूटिकल्स, बायोडीजल और प्लास्टिक निर्माण आदि में किया जाता है।

उन्होंने कहा कि यदि अरण्डी आधारित प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए तो किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रो. वीएस जैतावत ने किसानों के लिए द्वितीयक कृषि पर विशेष कार्य करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण प्रमुख है। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

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