
कालन्द्री/ सिरोही। मुंह और गर्दन में लोहे का डिब्बा और तार फंस जाने से पिछले चार दिनों से बन्दर भूख प्यास से परेशान होकर मरने के कगार पर पहुंच गया था। समय पर पहुंचकर वन विभाग जोधपुर और स्थानीय टीम ने ट्रैंक्यूलाइज गन से बन्दर को बेहोश कर उसे कब्जे में ले लिया और उसे जीवनदान देकर परेशानी से मुक्त करवाया।
सिरोही जिले के कालन्द्री उपतहसील क्षेत्र के तंवरी गांव की इस घटना से ग्रामीण काफी दुखी हो रहे थे। शिवसेना तंवरी के कैलाशपुरी की सूचना पर सोमवार को जय हो विश्व कल्याण ट्रस्ट संयोजक विक्रम रावल कालन्द्री व भगवत सिंह चारण वराल अपने रेस्क्यू टीम के साथ तंवरी पहुंचे। जहां काफी मशक्कत के बाद भी कामयाबी नहीं मिली। बंदर के मुंह में डिब्बा फंसा होने के कारण वह वह परेशान तो था ही। साथ ही भूख प्यास से भी व्याकुल हो रहा था। हालांकि उसकी आंख खुली होने के कारण बंदर को उछल कूद में कोई परेशानी नहीं आ रही थी। लेकिन उछल कूद के कारण वह पकड़ में नहीं आ रहा था।
वन्यजीव प्रेमी विक्रम रावल ने कालन्द्री नाका वन विभाग सहायक वनपाल विजेंद्र सिंह से संपर्क कर जोधपुर से ट्रैंक्यूलाइज गन मेन की स्पेशल टीम को बुलाने के लिए निवेदन किया। विभाग के सिरोही जिला अधिकारियों की सहमति से जोधपुर से स्पेशल टीम बुलाई गई। मंगलवार सुबह जोधपुर के टीम प्रभारी बंशीलाल सांखला, मांगीलाल बिश्नोई समेत वनपाल नाका कालन्द्री क्षेत्र वनपाल भँवर सिंह, सहायक वनपाल वीराराम मीणा, विजेन्द्र सिंह, पशु रक्षक शेशाराम समेत पूरी टीम ने विवेक व अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए सावधानी पूर्वक बन्दर पर पहले निशाना साधा और उसे बेहोश कर दिया।
इस कार्य में तंवरी ग्रामवासियों का भरपूर सहयोग रहा। आवश्यक उपचार के बाद बन्दर को पीड़ा से मुक्त करते हुए उसे जीवन दान देने में ग्रामीण और वन विभाग की टीम कामयाब रही। प्रसन्न मन से ग्रामीणों ने कहा जांको राखे साईंयां, मार सके ना कोय। इस नेक कार्य में तंवरी मढ़ी आश्रम संत जीवनगिरी महाराज, शिवसेना नगर अध्यक्ष जेपाराम कलबी, दिनेश सुथार एवं ग्रामीणों के साथ वन्यजीव प्रेमियों ने अपना काफी सहयोग दिया।