
माउंट आबू को देश-दुनिया से जोड़ने वाला एकमात्र सड़क मार्ग। फोटो पत्रिका
Bharatmala Project : राजस्थान के एकमात्र पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू को देश-दुनिया से बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए प्रस्तावित भारतमाला परियोजना पिछले 9 वर्षों से फाइलों में अटकी हुई है। माउंट आबू के वैकल्पिक मार्ग और गुरुशिखर को सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग-27 से जोड़ने की यह महत्वाकांक्षी परियोजना यदि धरातल पर उतरती है तो न केवल माउंट आबू को वैकल्पिक सड़क मार्ग मिलेगा, बल्कि यहां का पर्यटन भी नई उड़ान भर सकेगा।
केन्द्र सरकार ने वर्ष 2016-17 में भारतमाला परियोजना के तहत किवरली से तलहटी होते हुए गुरुशिखर तक नया मार्ग विकसित करने की योजना बनाई थी। प्रारंभिक सर्वे, विभागीय बैठकों और डीपीआर तैयार करने की कवायद भी शुरू हुई, लेकिन बाद में मामला उलझ गया। नतीजतन यह महत्वाकांक्षी योजना आज तक कागजों से बाहर नहीं निकल सकी।
प्रस्तावित योजना के तहत किवरली से गुरुशिखर तक करीब 41 किलोमीटर लंबा मार्ग विकसित किया जाना था। इसमें बनास नदी पर एक बड़ा पुल, पांच छोटे पुल, 33 खतरनाक मोड़ों का सुधार, सुरक्षा दीवारें, जल निकासी नालियां और बड़े जंक्शन विकसित करने की योजना शामिल थी। बाद में तरतोली-मानपुर की ओर से मार्ग ले जाने का सुझाव आया। इसी दौरान रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज या अंडरपास निर्माण को लेकर विभागों में सहमति नहीं बन सकी और योजना अधर में अटक गई।
रियासतकाल में राजा-महाराजाओं के ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए बनी कार्टरोड को ब्रिटिश शासनकाल में एकतरफा सड़क मार्ग के रूप में विकसित किया गया था। साढ़े तीन दशक पहले इस मार्ग को चौड़ा किया गया, लेकिन यातायात बढ़ने से समस्या आज भी बरकरार है। माउंट आबू (सिरोही) में आर्मी, एयरफोर्स, सीआरपीएफ की आंतरिक सुरक्षा अकादमी और इसरो स्थित हैं। ऐसे में वैकल्पिक मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वर्तमान में माउंट आबू आवागमन के लिए आबूरोड-माउंट सड़क मार्ग ही एकमात्र रास्ता है। बारिश के दौरान अक्सर चट्टानें खिसकने, सड़क धंसने और मलबा गिरने की घटनाओं से मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। पिछले दिनों बिपरजॉय तूफान के दौरान एक सप्ताह तक यह मार्ग ठप रहा था। इससे पर्यटकों, स्थानीय लोगों और आपातकालीन सेवाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई बार पर्यटक बीच रास्ते में ही फंस जाते हैं।
बारिश के दौरान माउंट आबू मार्ग अवरुद्ध होने पर भारी संकट की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे में भारतमाला परियोजना के तहत वैकल्पिक मार्ग को मूर्तरूप देना अत्यंत आवश्यक है। योजना के धरातल पर उतरने से पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों का आवागमन सुगम होगा तथा पर्यटन को भी नई गति मिलेगी।
संजय सिंघल, पूर्व अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन माउंट आबू
केन्द्र ने माउंट आबू में गुरुशिखर को एनएच-27 से जोड़ने के लिए योजना प्रस्तावित की थी। वर्ष 2016-17 में एनएचएआई के कंसल्टेंट यहां आए थे और इस योजना की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर भेजी गई थी, लेकिन इसकी वर्तमान स्थिति की यहां कोई जानकारी नहीं है।
आरसी वराड़ा, एसई, पीडब्ल्यूडी
ऐसी योजना बनी थी, इसकी जानकारी नहीं है। दिल्ली में संबंधित मंत्रालय से जानकारी लेकर इस परियोजना को धरातल पर लाने का पूरा प्रयास करूंगा, ताकि माउंट आबू का पर्यटन बढ़े और जिले का विकास हो।
लुंबाराम चौधरी, सांसद, जालोर-सिरोही
Published on:
28 May 2026 10:48 am
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