सिरोही

महामहिम! ये भवन असुरक्षित है…

सिरोही. प्रदेश की ग्रीमष्कालीन राजधानी माउंट आबू के राजभवन की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालियां निशान लग रहा है। यहां पर सुरक्षा गार्ड तक नहीं है। इसके अलावा राजभवन में निगरानी को लेकर सीसीटीवी कैमरे तक भी नहीं लगे हैं।
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Mar 04, 2019
sirohi
महामहिम! ये भवन असुरक्षित है...

सिरोही. प्रदेश की ग्रीमष्कालीन राजधानी माउंट आबू के राजभवन की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालियां निशान लग रहा है। यहां पर सुरक्षा गार्ड तक नहीं है। इसके अलावा राजभवन में निगरानी को लेकर सीसीटीवी कैमरे तक भी नहीं लगे हैं। हालांकि, वारदात के बाद पुलिस ने आस-पास स्थित होटल्स समेत अन्य भवनों के बाहर लगे सीसीटीवी फुटैज खंगाले हैं। लेकिन राजभवन का जिम्मा संभालने वाले महकमे की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई बंदोबस्त नहीं किए गए। राजभवन महज एक चौकीदार के हवाले किया हुआ है। दरअसल, राजभवन की सार-संभाल का जिम्मा सार्वजनिक निर्माण विभाग के पास है। यहां राज्यपाल के आने पर ही चहलपहल रहती है। बाकी दिनों में राजभवन खाली रहता है। जहां एक चौकीदार, एक माली, एक सफाईकर्मी तैनात रहते हैं।
रात में चोरी का अंदेशा, कर्मचारी नहीं थे मौजूद
बताया जा रहा है चोरी की वारदात रात के समय हुई। इस समय राजभवन में कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। ऐसे में चोर रात के समय भवन में घुसे और चोरी की वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। किसी को भनक तक नहीं लगी।
करीब १०० साल पुराने हथियार
बताया जा रहा है कि राजभवन की दीवारों पर सजावट के लिए लगाए गए हथियार (बंदूक) करीब १००-१५० साल पुराने थे। पुराने होने से इनका कोई उपयोग नहीं हो रहा था। ऐसे में इनको दीवारों पर टांग दिया गया था।
...और पुलिस को सूचना भी देर से दी
पुलिस का प्रारम्भिक तौर पर मानना है कि चोरी की वारदात रात के समय हुई लेकिन पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी गई। पुलिस को काफी देर से वारदात की सूचना दी गई।
टीमों का गठन
पुलिस को कुछ सुराग हाथ लगे हैं। जिलेभर में पुलिस की अलग-अलग टीमों का गठन कर संभावित स्थलों से लेकर वन्यक्षेत्र में आरोपियों की तलाश की जा रही है। उदयपुर से फोरेंसिक जांच टीम भी माउंट आबू पहुंची और मौके से साक्ष्य जुटाए।
वर्ष १८६६ में बना था राजभवन
माउंट आबू में वर्ष १८६६ में राजभवन बना था। उस समय अंगे्रज अधिकारी यहां ग्रीष्मावकाश बिताने आते थे। ऐसे में अंग्रेजों ने खुद की सहूलियत के लिए इस भवन का निर्माण करवाया था। आजादी के बाद प्रदेश के राज्यपाल ग्रीष्मावकाश बिताने यहां आते रहे हैं।
सवालों में माउंट थाना पुलिस की गश्त व्यवस्था
राजभवन में चोरी की वारदात ने माउंट आबू थाना पुलिस की कार्यप्रणाली को भी संदेह के घेरे में है। शहर में नियमित गश्त और सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता बंदोबस्त का दावा करने वाली थाना पुलिस की पोल खुल गई है। राजभवन तक चोर पहुंच गए और थाना पुलिस को भनक तक नहीं लगी। जबकि, पुलिस का बीट सिस्टम बना हुआ है। इसके अलावा पेट्रोलिंग वाहन भी गश्त पर रहता है। बावजूद इसके चोर बेखौफ वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।
थाना प्रभारी ने काटी कन्नी
मामले में माउंट आबू थाना प्रभारी अचलसिंह देवड़ा भी कन्नी काटते नजर आए। इस सम्बंध में जानकारी चाहने के लिए उनके मोबाइल पर कॉल करने का प्रयास किया गया। काफी प्रयास के बाद उनसे सम्पर्क हुआ तो उन्होंने बाहर होने का हवाला देते हुए फोन काट दिया।

Published on:
04 Mar 2019 07:21 pm