सिरोही

‘दाता नहीं उगल रहे जेहन में छिपे मत का राज, रोडवेज बस में सफर कर टटोला मतदाताओं का मानस

विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही उम्मीदवार गांव-ढाणी तक दस्तक देकर मतदाताओं को रिझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे लेकिन मतदाता हैं कि जेहन में छिपे पत्ते तक खोलने से गुरेज कर रहे हं
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सिरोही से अमरसिंह राव

सिरोही. विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही उम्मीदवार गांव-ढाणी तक दस्तक देकर मतदाताओं को रिझाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे लेकिन मतदाता हैं कि जेहन में छिपे पत्ते तक खोलने से गुरेज कर रहे हंै। मैं सोमवार को चुनावी हाल जानने के लिए सिरोही बस स्टैण्ड पहुंचा। यहां मैं सिरोही-जोधपुर वाया शिवगंज जाने वाली रोडवेज बस में चढ़ा और सफर के दौरान यात्रियों (मतदाता) का मानस टटोला।
रोडवेज बस में सिरोही से शिवगंज जा रहे मगनाराम मेघवाल से पूछा कि इस बार किसको वोट देंगे तो वे बोले- किसी पार्टी को नहीं, व्यक्ति को देखकर वोट दूंगा। मैंने पूछा-ऐसा क्यों... तो वे तपाक से बोले कि क्षेत्र की समस्याएं जस की तस हैं। हर बार पार्टी को देखकर वोट करते हैं लेकिन क्या फायदा... शिवगंज तो जैसा था वैसा का वैसा ही है। सवाल दागते हुए बोले- क्या शिवगंज में अब तक सीवरेज लाइन बिछी? क्या रेलवे स्टेशन बना, कभी रेल पहुंची? नहीं है ना...। इसलिए हम उसी को वोट करेंगे जो समस्या का जल्द समाधान करने की हि?मत रखता हो।
मैंने समीप की सीट पर बैठे संतोष कुमार से पूछा कि आप इस बार किस पार्टी की सरकार बना रहे हैं तो उन्होंने तपाक से एक पार्टी का नाम लिया। मैंने कहा- समर्थक हो क्या...पहले तो हिचकिचाए फिर बोले हां। मैंने कहा- सच बताइए... फिर बोले- कि पहले तो लग रहा सरकार कोई और पार्टी बना रही है लेकिन टिकट बंटवारे के बाद स्थिति बदली सी दिख रही है। इसलिए कह नहीं सकते कि सरकार कौन बना रहा है। पीछे की सीट पर बैठी सीतादेवी से पूछा कि इस बार किसको वोट देने जा रही हैं तो बोलीं- जहां इच्छा करेगी उसको वोट देंगी। अभी तो सात तारीख को खूब दिन बाकी हैं। इनके बगल में बैठी कविता बोलीं कि जो पार्टी अच्छा काम करेगी और रोजगार देगी, हम वोट उसी को देंगे।

जैसे हाथ में आया लड्डू कोई चुरा ले गया...

एक कम्पनी में नौकरी करने वाले घनश्याम भाई और रामलाल सेे पूछा कि इस बार किसकी सरकार बनाने जा रहे हो तो दोनों ने साफ शब्दों में कहा कि टिकट वितरण से पहले स्थिति अलग थी और उसके बाद स्थिति एकदम बदल गई है। बोले-अब सही मायने में कह नहीं सकते कि किसकी सरकार बनने जा रही है लेकिन इतना तो तय है कि पहले जो लग रहा था, वैसा अब नहीं होने वाला और जो होगा वह अचंभित करने वाला होगा। पूछा कैसे...तो तपाक से बोले- समझो ऐसे लग रहा है कि जैसे हाथ में आया लड्डू मुंह में जाने से पहले ही कोई चुरा ले गया?

Published on:
27 Nov 2018 10:46 am