सिरोही

मस्तिष्क को दूषित करते हैं विचारों के विकार

माउंट आबू. रघुनाथ मंदिर परिसर में जयमल जैन आध्यात्मिक ज्ञान, ध्यान, संस्कार शिविर में बुधवार को प्रवचन समेत कई कार्यक्रम हुए। इस मौके आचार्य पाश्र्वचंद्र महाराज ने कहा कि स्वभाव, व्यवहार में सहजता, सरलता व विनम्रता मानवीय आभूषण हैं। विचारों का विकार मस्तिष्क को दूषित करके व्यक्ति को कुंठित करता है।
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May 22, 2019
sirohi
मस्तिष्क को दूषित करते हैं विचारों के विकार

माउंट आबू. रघुनाथ मंदिर परिसर में जयमल जैन आध्यात्मिक ज्ञान, ध्यान, संस्कार शिविर में बुधवार को प्रवचन समेत कई कार्यक्रम हुए। इस मौके आचार्य पाश्र्वचंद्र महाराज ने कहा कि स्वभाव, व्यवहार में सहजता, सरलता व विनम्रता मानवीय आभूषण हैं। विचारों का विकार मस्तिष्क को दूषित करके व्यक्ति को कुंठित करता है। नकारात्मक विचार ही विकारों को जन्म देते हैं। विकारों से बचने के लिए ही उपचार, आराधना व साधना की जाती है। साधना भौतिक पदार्थों के लिए नहीं, आत्मगुणों के विकास को की जाती है। आत्मगुणों के विकास से दुर्विचार का विनाश होता है। दुर्विचारों ने ही जीवन के चारों ओर विष वृक्षों की झाडिय़ां उगा दी है, जो तीक्षण वं जहरीले कांटों की तरह व्याप्त है। उसमें से निकले बिना शाश्वत सुखानुभूति नहीं होती। विचारों की कंटीली व विषैली झाडिय़ों से बाहर आने का मार्ग एक ही है - स्वस्थ वैचारिक क्रांति। आत्म कल्याण को दृढ़ संकल्पित व्यक्ति मुक्ति-जीवनमुक्ति के अविनाशी पद को प्राप्त होता है।
आचार्य ने कहा कि बिना सोचे समझे हृदय को जख्मी करने वाले बोल नहीं बोलने चाहिए। इंदौर के अनिल दुगड़, जयश्री दुगड़, गुवाहाटी के जीवनचंद कांकरिया, पाली के गौतमचंद धारीवाल व अनिल मेहता ने शिविर निरीक्षण किया। जिनका संघ की ओर से सम्मान किया गया। उपवास करने वाले शिविरार्थियों का सुरेशचंद रूणवाल की ओर से सम्मान किया गया। मुल्तानमल मेहता ने भी विचार व्यक्त किए। संजय पींचा ने मंच संचालन किया।

Published on:
22 May 2019 08:42 pm