सिरोही

Sirohi News: झालावाड़ हादसे से नहीं ली सीख, जर्जर सरकारी स्कूल में कभी भी हो सकता है हादसा

सिरोही जिले के गुंडवाड़ा पंचायत अंतर्गत कोटड़ा खेड़ा राजकीय प्राथमिक विद्यालय में बच्चे हर दिन हादसे के डर के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय में कुल तीन कमरे हैं और तीनों ही जर्जरहाल है।
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Jul 08, 2026
sirohi govt school
गुंडवाड़ा पंचायत का कोटड़ा खेड़ा प्राथमिक विद्यालय जर्जर बरामदे में भी टपकता है पानी. Photo- Patrika

Sirohi News: मंडार/ सिरोही @ पत्रिका। गत वर्ष राजस्थान के झालावाड़ जिले में जर्जर विद्यालय भवन की छत गिरने से कई मासूम बच्चों की जान चली गई थी। उस दर्दनाक हादसे के बाद प्रदेशभर के जर्जर विद्यालय भवनों की जांच और मरम्मत के सख्त निर्देश दिए गए, कई जर्जर भवनों के चलते विद्यालयों को शिफ्ट भी किया गया, लेकिन अभी भी कुछ जगह जर्जर भवनों में बच्चों की पढ़ाई हो रही है।

सिरोही जिले के गुंडवाड़ा पंचायत अंतर्गत कोटड़ा खेड़ा राजकीय प्राथमिक विद्यालय की स्थिति बताती है कि अब भी सबक नहीं लिया गया है। यहां बच्चे हर दिन हादसे के डर के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय में कुल तीन कमरे हैं और तीनों ही जर्जरहाल है।

विद्यालय में कक्षा पहली से पांचवीं तक 32 विद्यार्थियों का नामांकन है। गांव में अलग से आंगनबाड़ी केंद्र नहीं होने के कारण 10 छोटे बच्चे भी यहीं आते हैं। विद्यालय में कुल तीन कमरे हैं और तीनों ही जर्जर हो चुके हैं। सबसे अधिक खतरा उस कमरे से है, जिसकी छत करीब आधा फीट तक नीचे झुक गई है। किसी अनहोनी की आशंका के चलते उसमें बच्चों को बैठाना बंद कर उसे स्टोर बना दिया गया है, लेकिन शेष दो कमरों और बरामदे की छत भी जर्जर है।

बाहर निकले सरिए, बारिश में टपकता पानी

शेष दोनों कमरों और बरामदे की छत का प्लास्टर भी झड़ रहा है। कमरों और बरामदे की छत का प्लास्टर गिरने से लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं। कमरों की दीवारों से पानी रिसता है और बरामदे की छत तो इस कदर क्षतिग्रस्त है कि बारिश होते ही पानी टपकना शुरू हो जाता है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए खतरा बना हुआ है।

जर्जर माना, कार्रवाई बाकी

प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार चौधरी ने बताया कि विद्यालय वर्ष 1997 में शुरू हुआ था। एक कमरा वर्ष 2000 तथा दो कमरे वर्ष 2004 में बने थे। भवन की जर्जर स्थिति की सूचना पिछले वर्ष ही विभाग को भेज दी गई थी। विभाग ने भवन को जर्जर मान लिया है, लेकिन अब तक इसे आधिकारिक रूप से जर्जर घोषित नहीं किया गया और न ही नए भवन या मरम्मत की कोई ठोस कार्रवाई हुई है।

विद्यालय में कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, स्मार्ट टीवी और अन्य शिक्षण सामग्री उपलब्ध है, लेकिन सुरक्षित भवन के अभाव में शिक्षक और अभिभावक लगातार चिंता में हैं। बारिश का मौसम शुरू होने के साथ ही हादसे की आशंका और बढ़ गई है।

झालावाड़ हादसे के बाद भी नहीं जागा तंत्र

गत वर्ष झालावाड़ में जर्जर विद्यालय भवन की छत गिरने से 7 मासूम बच्चों की मौत और कई घायल हो गए थे। उस घटना के बाद राज्यभर में जर्जर स्कूल भवनों की पहचान कर उन्हें खाली कराने और मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कोटड़ा खेड़ा विद्यालय जैसे कई भवन अब भी बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे खतरे के साये में पढ़ने को मजबूर है, लेकिन विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। जबकि बारिश में हर पल डर बना रहता है।

इनका कहना है

विद्यालय में कुल 3 कमरे हैं, जिनमें से एक की छत झूलने से उसे बंद कर स्टोर बना दिया है। शेष दो कमरों में बच्चों की पढ़ाई करवाई जाती है। दोनों कमरों और बरामदे की छत का प्लास्टर गिरने से सरिए निकल आए हैं। पिछले साल भवन जर्जर होने की विभाग को जानकारी भेजी थी। बारिश के मौसम में चिंता तो रहती ही है।

  • दिनेश कुमार चौधरी, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, कोटड़ा खेड़ा
Updated on:
08 Jul 2026 01:44 pm
Published on:
08 Jul 2026 01:42 pm