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जयपुर में 3 महीने में दूसरी बार बढ़ी DLC रेट, क्या 17 विधायकों ने दी मूक सहमति? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Jaipur DLC Rates Hiked: डीएलसी दरों में बढ़ोतरी साल में एक बार होती है। लेकिन राज्य में वर्ष 2025 में एक बार भी डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) की बैठक कर दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई।
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DLC rates hiked in Jaipur

3 महीने में दूसरी बार बढ़ी DLC रेट। Photo: AI

जयपुर। डीएलसी दरों में बढ़ोतरी साल में एक बार होती है। लेकिन राज्य में वर्ष 2025 में एक बार भी डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) की बैठक कर दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई। गत वर्ष की इस कमी को पूरा करने के लिए इस बार अप्रैल से अब तक तीन माह में ही दूसरी बार दरों में भारी-भरकम बढ़ोतरी के प्रस्ताव पारित कर दिए गए। गौरतलब है कि जिला कलक्टर संदेश नायक की अध्यक्षता में हुई जिला दर निर्धारण समिति (डीएलसी) की बैठक में जयपुर जिले के 17 में से एक भी विधायक नहीं पहुंचा। माना जा रहा है कि विधायकों को दरों में बढ़ोतरी की जानकारी होने के बावजूद इस बैठक से दूरी बनाकर उन्होंने एक तरह से मूक सहमति दे दी।

विशेषज्ञों के अनुसार विधायक इसका विरोध करते तो इस पर पुनर्विचार हो सकता था। बैठक से पहले डीएलसी संशोधन के प्रस्ताव सभी सदस्यों को भेजे जाते हैं, ताकि यदि किसी प्रस्ताव पर आपत्ति हो तो समिति में उस पर चर्चा हो सके और आवश्यकता होने पर प्रस्ताव को रोका या पुनर्विचार के लिए भेजा जा सके।

ये होते हैं सदस्य

अध्यक्ष : जिला कलक्टर
सदस्य : जिले के सभी विधायक, जिला प्रमुख, जेडीसी, जेडीए सचिव, नगर निगम आयुक्त, उप पंजीयक और अन्य अधिकारी, डीआईजी स्टाम्प सदस्य सचिव

जरूरत नहीं या खानापूर्ति?

विशेषज्ञों के अनुसार डीएलसी दरों में संशोधन तभी किया जाता है, जब किसी क्षेत्र में वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी डीएलसी दर में बड़ा अंतर हो। इसके लिए उप पंजीयकों की रिपोर्ट, रजिस्ट्री दरें, विकास कार्य और बाजार का मूल्यांकन आधार बनता है। लेकिन सवाल यह है कि यदि अप्रैल में ही दरों का पुनरीक्षण किया गया था तो क्या उस समय बाजार का सही आकलन नहीं हुआ था, या फिर तीन महीने में ही जमीन के दाम इतने बढ़ गए कि दोबारा भारी संशोधन की जरूरत पड़ गई?

भाजपा विधायक कालीचरण सराफ और कांग्रेस विधायक रफीक खान के विरोध जताने के बाद अब भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य का कहना है कि शॉर्ट नोटिस पर बैठक की जानकारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि वे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कार्यक्रम में व्यस्त थे। उनका कहना है कि कोई भी महत्वपूर्ण बैठक सभी से राय लेकर आयोजित की जाए तो बेहतर रहता है। सभी के कार्यक्रम पहले से तय होते हैं। कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने कहा कि सूचना मिली थी। हमने कहा था कि जनहित में ही निर्णय लिया जाए। लेकिन अफसर सरकार के निर्देश पर काम कर रहे हैं। अफसरशाही हावी हो रही है।

विभाग का पक्ष

“डीएलसी की बैठक में सिर्फ दरों का समानीकरण किया गया है। ऐसा नहीं है कि हर क्षेत्र की दरें बढ़ी हैं। कई क्षेत्रों में दरें कम भी हुई हैं। बैठक की सूचना और प्रस्ताव के बारे में जानकारी उप पंजीयक की ओर से विधायक को दी जाती है।”
-देवेन्द्र जैन, डीआइजी स्टाम्प प्रथम