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राजस्थान: IPS अफसर के पास ही रहेगा 4 साल का बच्चा, हाईकोर्ट ने जैविक माता-पिता को सिविल प्रक्रिया अपनाने की दी सलाह

हाईकोर्ट ने 4 साल के बच्चे की कस्टडी जैविक माता-पिता को देने से इनकार करते हुए बच्चे को फिलहाल IPS अधिकारी के पास ही रहने दिया है। गोद लेने को लेकर विवाद के कारण कोर्ट ने मामले को सिविल कोर्ट में ले जाने की सलाह दी है।
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Court Order

फाइल फोटो: पत्रिका

Rajasthan News: हाईकोर्ट ने जैविक माता-पिता को उनके 4 साल के बच्चे की कस्टडी दिलाने से इनकार कर दिया जिससे बच्चा अभी जिसे 1 साल से अधिक समय से रख रहे IPS अधिकारी के घर ही रहेगा। हाईकोर्ट ने गोद को लेकर विवाद होने के चलते कस्टडी पर दखल देने से इनकार किया वहीं जैविक माता-पिता को बच्चे को वापस लेने के लिए सिविल कोर्ट जाने की सलाह दी है।

न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह और न्यायाधीश भुवन गोयल की खंडपीठ ने आगरा निवासी जैविक माता-पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दखल से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता माता-पिता की ओर से अधिवक्ता कपिल गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि पिता ने अपनी बहन के पास बच्चे को 20 दिन के लिए भेजा लेकिन बहन और उसके पति IPS अधिकारी ने बच्चा वापस देने से इनकार कर दिया।

याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि बच्चा न तो गोद दिया गया और न ही उसे गोद देने के कोई दस्तावेज है। इसके विपरीत IPS अधिकारी का कहना था कि बच्चे को पिछले साल मई में गोद लिया गया। गोद की रस्म आगरा में पूरी हुई और बच्चा अब जयपुर के एक नामी निजी स्कूल में पढ़ रहा है।

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि बच्चे को अवैध हिरासत में नहीं माना जा सकता। बच्चे की सुपुर्दगी के लिए सिविल प्रक्रिया अपनाते हुए अलग से याचिका दायर की जाए। इस मामले में गोद लेने की प्रक्रिया को लेकर भी विवाद है, ऐसे में सिविल कोर्ट में ही सुनवाई हो सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से कस्टडी का फैसला नहीं किया जा सकता क्योंकि मामले में कई कानूनी पहलुओं की जांच जरूरी है। दोनों पक्ष अब सिविल कोर्ट में अपना पक्ष रख सकेंगे।

IPS महिला से विवाह के कारण बदला था कैडर

इस विवाद में शामिल IPS अधिकारी मूलत: जयपुर-कश्मीर कैडर से थे, जो राजस्थान कैडर की महिला IPS से विवाह कर लेने पर राजस्थान कैडर में शामिल हो गए। बाद में दोनों का तलाक हो गया और IPS अधिकारी ने दूसरा विवाह कर लिया। बच्चा दूसरी पत्नी के भाई का है, जिसे गोद लेने को लेकर विवाद है। मामला सामने आने के बाद बच्चे की कस्टडी को लेकर दोनों पक्षों के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। फिलहाल हाईकोर्ट ने कस्टडी में बदलाव करने से इनकार करते हुए सिविल प्रक्रिया अपनाने को कहा है।