
आबूरोड. गजनी फ्लिम के मुख्य किरदार की भूलने की लत पर वह अपने शरीर पर लोगों के नाम और नंबर आदि लिखता है। ऐसा ही आबूरोड के आदिवासी क्षेत्र के की महिलाओं ने देखने को मिल रहा है, लेकिन यहां भूलने की लत नहीं, बल्कि पहचान और अपनेपन के भाव को और मजबूत करने का तरीका है। यहां की आदिवासी ं महिलाएं ओढऩी ब्लाउज पर अपना तथा अपने खास करीबी रिश्तेदारों के नाम कशीदे से लिखवाती है। इससे यह प्रतित होता हैं, कि रिश्तेदारी रखने में ये किसी से कम नहीं है। ये खुद की पहचान और करीबी के प्रति अपनेपन का अनूठा अंदाज है।
झलकता है अपनापन
समय के साथ आदिवासी क्षेत्रों में भी बदलाव की बयार बह रही है। उपखण्ड क्षेत्र में ये महिलाएं भले शिक्षा से वंचित रही है, लेकिन इनमें अपनापन कूट-कूटकर भरा है। ऐसे में उन्होंने रिश्ते को और खास बनानो के लिए नया तरीका अपनाया है। पढ़े-लिखे लोग जहां हाथों पर डाई से नाम लिखवाते है, तो ये आदिवासी महिलाएं ओढऩी या ब्लाउज पर अपने बेटे, सहेली, बहन, पति व अन्य परिजनों के नाम कसीदे से कढ़वाते हैं।
सेहत के लिए भी जागरूक
सियावा की भावना ने बताया कि यहां पहले नाम गुदवाने का चलन बहुतायत में था। हालांकि अब भी कई महिलाएं हाथों पर किसी का नाम लिखवाती है, लेकिन शारीरिक नुकसान के चलते इसमें कमी आने लगी है। बदले में झुलकी पर नाम कसीदा कढ़वाने का चलन बढ़ा है। पुरानी परम्परा को नया रूप मिला है और गोदने के दर्द से भी राहत मिली है।
सौलह श्रृगांर भी कम नही
आदिवासी युवतियों में सौलह श्रृगांर करने में भी कम नहीं हैं। ये युवतियां ज्यादातर चांदी के आभूषणों का उपयोग करती है। कान की झुमकें, गले में हार, हाथों के पान समेत कई नए आभूषण से सजती है।