शहर का कोई कोना ऐसा नहीं है जो अतिक्रमण से मुक्त हो। बेशक यह अतिक्रमण कहीं अस्थाई अतिक्रमण की शक्ल में है तो कहीं स्थाई की शक्ल में।
शहर का कोई कोना ऐसा नहीं है जो अतिक्रमण से मुक्त हो। बेशक यह अतिक्रमण कहीं अस्थाई अतिक्रमण की शक्ल में है तो कहीं स्थाई की शक्ल में। प्रशासन जब अस्थाई अतिक्रमण ही हटाने में दिलचस्पी नहीं ले रहा तो स्थाई अतिक्रमण हटाने की तो बात करना भी बेमानी होगा। शहर का मुख्य बाजार तो कई सालों से अस्थाई अतिक्रमण का दंश झेल ही रहा था, अब तो शहर में ऐसे अस्थाई अतिक्रमण के कई स्पॉट बन गए है जहां अस्थाई अतिक्रमण की भरमार है। कई अतिक्रमण तो ऐसे है जो कहने को तो अस्थाई अतिक्रमण की श्रेणी में आते है, पर सच्चाई यह है कि वे किसी स्थाई अतिक्रमण से कम नहीं है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अधिकतर अस्थाई अतिक्रमण आजीविका चलाने के लिए किए जाते है पर कई बार ये अस्थाई अतिक्रमण ही स्थाई हो जाते है और इनका खामियाजा राहगीरों व वाहन चालकों को स्थाई रूप से भुगतना पड़ता है। शहर में ऐसे कई स्पॉट है जहां ऐसे अस्थाई अतिक्रमण का लोगों को रोजाना खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
पग-पग पर बन गए है स्पॉट
मुख्य बाजार व सदर बाजार में तो व्यापारी दुकानों के आगे माल सामान जमाकर रोजाना अस्थाई अतिक्रमण करते ही है, उससे आगे फुटपाथ पर भी सुबह से ही दुकानें सज जाती है। फिर ठेले वाले आधी सड़क घेर लेते हैं। हालांकि शाम होने पर व्यापारी तो अपनी दुकानदारी समेट लेते है, पर ठेले वाले दुकानदारी समेपटने के बाद ठेले वहीं खड़े करके चले जाते हैं। रेलवे स्टेशन-बस स्टैण्ड रोड पर दिनभर अस्थाई अतिक्रमण रहता है। कई सब्जी विक्रेता, नाश्ते के ठेले वाले व टैक्सियां चलाने वाले अतिक्रमण कर लेते है। कमोबेश यही हाल पुरानी सब्जी मंडी व पुराना चैक-पोस्ट इलाके का है। फुटपाथ पर बैठकर व्यापार करने वाले तो चले जाते है, पर ठेले व लारियां वहीं छोड़ जाते हैं, जिससे अतिक्रमण बना ही रहता है।
मानपुर तिराहे पर हो गई है भरमार
मानपुर तिराहे का हाल तो और भी विकट है। तिराहे से रेवदर की ओर जाने वाले मार्ग पर कई अतिक्रमण ऐसे है तो अस्थाई की श्रेणी में आते है, पर वे स्थाई से कम नहीं है। इन अतिक्रमियों ने पूरी फुटपाथ को ही घेरकर उस पर कब्जा जमा लिया है। ठेले व फुटपाथ पर सजा सामान दिन-रात वहीं पड़ा रहता है। दिक्कत यह है कि रेवदर रूट पर चलने वाली बसों में सफर के लिए वहां खड़ा रहकर बस का इंतजार करने में पसीने छूट जाते है। उन्हें सड़क पर खड़ा रहकर बस या टैक्सी का इंतजार करना पड़ता है। जैसे ही कोई बस या टैक्सी मानपुर तिराहे से मुड़ती है, उनके चपेट में आने का खतरा मंडराता रहता है। खास तौर पर राहगीरों व यात्रियों की इस समस्या पर न तो पालिका प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही यातायात पुलिस। वहां फुटपाथ पर जितने भी अतिक्रमण हुए है वे सिर्फ कहने के ही अस्थाई है। सच तो यह है कि वे किसी भी लिहाज से स्थाई अतिक्रमण से कम नहीं है।
कमेटी का ही अभी अता-पता नहीं
गत 9 फरवरी को हुई बजट बैठक में पार्षद रेखादेवी समेत कुछ पार्षदों ने अतिक्रमण व अवैध निर्माण का मुद्दा उठाया तो ईओ प्रवीणकुमार ने बताया था कि सर्वे के लिए एक कमेटी गठित की गई है जो पंद्रह दिन में रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट के आधार पर ही अतिक्रमियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। दिलचस्प बात तो यह है कि इस कमेटी का कोई अता-पता ही नहीं है। जानकारी के अनुसार पालिका ने कमेटी गठित करने की कवायद शुरू की तो, पालिका उपाध्यक्ष गणेश आचार्य ने कमेटी में पांच या छह सदस्य रखने के मसले को लेकर कमेटी गठन को ही खटाई में डाल दिया। अब जब भी कमेटी गठित होगी, उसे सर्वे के लिए कम से कम एक पखवाड़े का समय तो देना ही पड़ेगा। फिर उसकी रिपोर्ट पालिका बोर्ड की बैठक में प्रस्तुत कर चर्चा की जाएगी और उसके बाद ही अंतिम निर्णय किया जाएगा। मसलन अभी महीने-दो महीने पूर्व तो कोई कार्रवाई हो, ऐसा लग नहीं रहा है।
इन्होंने बताया ...
हालांकि अभी तक हम कमेटी गठित नहीं कर पाए है, पर सोमवार के दिन मैं गठित कर दूंगा। गठन के बाद कमेटी सर्वे का काम करेगी। मानपुर तिराहे पर बिजली के तीन खम्भों के कारण अतिक्रमण हो गया है, जिन्हें हटवाने के लिए मैंने डिस्कॉम से कहा हुआ है। डिस्कॉम जैसे ही खम्भे हटवाएगा, वहां से सभी अस्थाई अतिक्रमियों को खदेड़ दिया जाएगा।
- सुरेश सिंदल, पालिकाध्यक्ष, आबूरोड।