
Neighbors quarrel over dogs in Rajasthan ai image
सविता व्यास
जयपुर। 'संकट में सबसे पहले पड़ोसी ही काम आते हैं'- यह कहावत अब बदलते शहरी जीवन में फीकी पड़ती दिख रही है। आज हालात ऐसे हैं कि पालतू कुत्तों को लेकर छोटी-छोटी तकरारें पड़ोसियों के रिश्तों में दरार डाल रही हैं। रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटियों और मोहल्लों में कभी भौंकने की आवाज, कभी गंदगी, तो कभी कॉमन एरिया के इस्तेमाल को लेकर शुरू हुआ विवाद गाली-गलौज, मारपीट और पुलिस शिकायत तक पहुंच जाता है। जिन पड़ोसियों से कभी मदद की उम्मीद होती थी, वही अब कानूनी लड़ाइयों में आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो पिछले पांच वर्षों में शहरी भारत में कुत्तों से संबंधित शिकायतों में 40 फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ है। राजधानी जयपुर की बात करें तो रोजाना डॉग बाइट के 20 मामले सामने आ रहे हैं। जबकि देशभर में यह आंकड़ा हजारों में है।
कुत्ते का नाम 'शर्माजी' रख उड़ाया पड़ोसी का मजाक
इंदौर में कुत्ते के नाम को लेकर शुरू हुआ विवाद मारपीट तक पहुंच गया। आरोप है कि भूपेंद्र सिंह ने अपने पालतू कुत्ते का नाम 'शर्माजी' रखकर पड़ोसी वीरेंद्र शर्मा परिवार का मजाक उड़ाया। विरोध करने पर दोनों पक्षों में गाली-गलौज और मारपीट हुई, जिसमें दंपती घायल हो गए। इसके बाद राजेंद्र नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
अदालतोंं पर बढ़ रहा अनावश्यक बोझ
बेंगलूरु के एक मामले पर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कुत्तों को लेकर पड़ोसियों के बीच बढ़ते विवादों पर चिंता जताई। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि गैर-जिम्मेदार पालतू स्वामित्व के कारण तुच्छ मामले भी आपराधिक अदालतों तक पहुंच रहे हैं, जिससे न्यायालयों पर बोझ बढ़ रहा है। मामला 29 दिसंबर 2025 की घटना से जुड़ा है, जब कथित तौर पर एक कुत्ते के घर के बाहर गंदगी करने पर शुरू हुआ विवाद हाथापाई में बदल गया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते शहरीकरण और फ्लैट कल्चर ने पालतू जानवरों और इंसानों के साझा स्थान को सीमित कर दिया है। जहां एक ओर पशु प्रेमी अपने अधिकारों की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का हवाला देने वाले पड़ोसी इसे 'खतरा' मानते हैं। यह विवाद केवल 'पालतू' तक सीमित नहीं है, बल्कि 'स्ट्रीट डॉग्स' को खिलाने को लेकर भी हिंसक झड़पें आम हो गई हैं।
चर्चित मामले और कोर्ट के बड़े फैसले
एम्मा और दिल्ली का मामला (2024-25) : दिल्ली की एक सोसाइटी ने लिफ्ट में कुत्तों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी सोसाइटी पालतू जानवरों को लिफ्ट या पार्क जैसी सुविधाओं से वंचित नहीं कर सकती, बशर्ते मालिक सुरक्षा नियमों का पालन करें।
केरल बनाम आवारा कुत्ते (2025) : सुप्रीम कोर्ट ने हालिया सुनवाई में कहा कि इंसानी जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन कुत्तों की नसबंदी ही स्थायी समाधान है। कोर्ट ने 'डेंजरस डॉग्स' को चिन्हित करने और उनके टीकाकरण को अनिवार्य बनाने का आदेश दिया।
देश में कुत्तों को लेकर कहां कितने विवाद
राजस्थान में जयपुर बना हॉटस्पॉट
राजस्थान में पिछले पांच वर्षों में कुत्तों के हमले और पड़ोसी विवादों में भारी उछाल आया है। विशेषकर जयपुर, जोधपुर और कोटा में शिकायतें बढ़ी हैं। राजस्थान में पिछले 5 वर्षों में राज्य में कुत्तों से जुड़े लगभग 4,500 से अधिक छोटे-बड़े मामले दर्ज हुए, जिनमें अधिकांश पड़ोसियों के बीच मारपीट के थे। जयपुर में 2024 में 307 मामले थे, जो 2025 में बढक़र 633 हो गए। जोधपुर में पिछले 5 वर्षों में करीब 1,200 से अधिक पुलिस शिकायतें दर्ज की गईं।
पड़ोंसियों से विवाद की मुख्य जड़ें
समाधान का रास्ता
राजस्थान में 5 साल के आंकड़े
वर्ष मामले
2021 450
2022 620
2023 890
2024 1,150
2025 1,400 (अनुमानित)
(नोट : इनमें पुलिस रिपोर्ट और एनसीआर दोनों शामिल हैं)
Updated on:
07 Apr 2026 04:28 pm
Published on:
07 Apr 2026 04:28 pm
