बेरहम पिता ने तीन मासूम बेटियों को चलती ट्रेन से फेंक दिया। घटना में एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि दो मासूमों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
सीतापुर. सीतापुर में एक बेरहम पिता ने तीन मासूम बेटियों को चलती ट्रेन से फेंक दिया। घटना में एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि दो मासूमों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि एक बच्ची रामकोट थाने के गौरा गांव के पास तो दूसरी इसी थाना क्षेत्र के भवानीपुर के पास बेहोश मिली। वहीं, तीसरी बच्ची का शव मानपुर थाना क्षेत्र के रमईपुर हाल्ट के करीब मिला। यह वारदात अमृतसर-सहरसा एक्सप्रेस में हुई। बच्चियां अपने पिता के साथ ही ट्रेन में सफर कर रही थीं।
जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह लगभग चार बजे अमृतसर से बिहार के सहरसा जा रही ट्रेन नम्बर 15210 अमृतसर-सहरसा जनसेवा एक्सप्रेस से तीन मासूम बच्चियों को उसके पिता ने ही किसी बात पर नाराज होकर ट्रेन से फेंक दिया। सुबह लगभग साढ़े सात बजे जिले के रामकोट थाना क्षेत्र के भवानीपुर गांव के पास टहलने निकले स्थानीय लोगों ने एक बच्ची को रेल पटरी के किनारे बेहश पाया। बेहोश बच्ची को पानी के छींटे मारकर होश में लाया गया। सीओ सिटी ने बताया कि मोतिहारी के एसपी से संपर्क साधा गया है। बच्चियों के बताए अनुसार उसके परिजनों की खोजबीन की जा रही है। जीआरपी एसओ को केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
एम्बुलेंस से दोनों बच्चियों को जिला अस्पताल लाया गया
होश में आने पर आठ साल की अल्बुन खातून ने कुछ दूर पहले छोटी बहन को भी फेंके जाने की जानकारी दी। लोगों ने यूपी डायल 100 के साथ 108 एम्बुलेंस को इसकी सूचना दी और अन्य ग्रामीणों को लेकर दूसरी बच्ची की खोज में जुट गए। लगभग एक किलोमीटर दूर दूसरी बच्ची बेहोशी की हालत में पड़ी मिली। एम्बुलेंस से दोनों बच्चियों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां दोनों का उपचार चल रहा है।
रेलवे पुलिस का फिर दिखा लापरवाही भरा रवैया
इस मामले में जब सीतापुर पुलिस द्वारा जीआरपी थाने से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने यह कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया कि यह हादसा उनके अंडर में नही आता, जिसके बाद सीतापुर के सीओ सिटी योगेंद्र सिंह ने मामले को संज्ञान लिया और एक टीम बनाई और दोनों बच्चियों की सुरक्षा में आरक्षी को तैनात कर दिया। इस मामले को लेकर एक स्थानीय नागरिक अरसद ने बताया कि उसने रेलवे ट्रैक पर बच्चियों को पड़ा पाया और फौरन बिना किसी की परवाह किए बगैर इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाने की तैयारी कर ली। फिलहाल समय से अस्पताल पहुंचने की वजह से दोनों बच्चियों की जान बच गई और अब वह खतरे से बाहर हैं। आठ साल की अल्बुन खातून ने होश में आने के बाद बताया कि बिहार के मोतिहारी जिले के गांव छोडिय़ा निवासी अपने पिता इद्दू व मां अबलीना खातून के साथ ट्रेन से जा रही थी। सुबह के समय उसकी मां अबलीना खातून गहरी नींद में सो गई। इसी दौरान उसके पिता उसकी छह वर्षीय बहन सलीना खातून को गेट के पास लेकर पहुंचे और चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। इसके बाद उसे भी गेट के पास ले गए और फेंक दिया।