
बिहार के सीवान में प्रदर्शनकारी छात्रों पर AK-47 से हुई फायरिंग का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में सीवान एसपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया है। घटना को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों को निशाना बनाकर AK-47 से गोली चलाई। उनका यह भी दावा है कि छात्रों पर केवल AK-47 ही नहीं, बल्कि लॉन्ग रेंज राइफल और पिस्टल से भी फायरिंग की गई।
पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान 6 से 8 राउंड फायरिंग हुई थी। इस घटना में तीन छात्र घायल हुए हैं, जिसके बाद विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि 25 जुलाई को आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बन गईं, जिनकी वजह से पुलिस को गोली चलाने जैसा कदम उठाना पड़ा।
घटनास्थल के आसपास मौजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान उग्र भीड़ ने पुलिसकर्मियों को चारों ओर से घेर लिया था। इससे पहले प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई पत्थरबाजी में सीवान के पुलिस अधीक्षक (एसपी) समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि उस समय पुलिस फायरिंग नहीं करती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।
हालांकि, इस मामले पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष अब तक सामने नहीं आया है। सीवान एसपी से दो बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं, सूत्रों का कहना है कि प्रदर्शन में कुछ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी शामिल थे। दावा किया जा रहा है कि वे हाल ही में अपने एक नेता के घर हुई छापेमारी से नाराज थे और प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दरअसल, 22 जुलाई को पटना में हुए छात्र प्रदर्शन के बाद हुई गिरफ्तारियों के विरोध में AISA ने 25 जुलाई को 'बिहार बंद' का आह्वान किया था। इसी के तहत सीवान के गांधी मैदान में स्थानीय नेताओं की ओर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आयोजन किया गया था, जिसमें विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए।
पुलिस का कहना है कि प्रशासन ने केवल गांधी मैदान में प्रदर्शन की अनुमति दी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी इसके बाद शहर के कई प्रमुख स्थानों पर पहुंच गए और सड़क जाम करने लगे। गांधी मैदान, जेपी चौक, गोपालगंज मोड़ और सीवान कचहरी समेत कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने यातायात बाधित कर दिया।
पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों से कई बार सड़क खाली करने और निर्धारित स्थल पर लौटने की अपील की गई, लेकिन भीड़ लगातार उग्र होती गई। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया गया, जिसमें एसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
पुलिस का दावा है कि हालात बेकाबू होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इसके बाद फायरिंग की गई। हालांकि, फायरिंग किस स्तर की परिस्थितियों में की गई और बल प्रयोग की आवश्यकता कितनी थी, इसको लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं। यही वजह है कि घटना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर विवाद का विषय बनी हुई है।