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AK-47 की गूंज पर उठे सवाल, एक गोली पुलिस की तो दो और किसकी? सिवान कांड पर सियासी संग्राम

सीवान में पुलिस एक व्यक्ति के गोली लगने की पुष्टि की है, लेकिन दो अन्य लोगों के घायल होने पर अब भी सवाल बने हुए हैं उनको जो गोली लगी वो किसकी थी?
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सिवान

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Rajesh Kumar Ojha

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Updated: 31 Jul 2026, 8:57 PM IST

policeman ak47 firing

सीवान में छात्रों पर AK-47 से फायरिंग करता पुलिसकर्मी। फोटो-एक्स

बिहार में पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से फायरिंग का मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। पुलिस का कहना है कि फायरिंग के दौरान एक व्यक्ति को गोली लगी है, लेकिन दो अन्य लोगों को गोली कैसे लगी, इस सवाल पर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि अन्य दो लोग किसकी गोली से घायल हुए।

यह मामला बिहार के सीवान जिले का है। सोशल मीडिया पर AK-47 से फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) विपक्ष पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने और "नैरेटिव गढ़ने" का आरोप लगा रही है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने छात्र आंदोलन से निपटने में जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है।

हालांकि, NDA की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद और बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी की बेटी शाम्भवी चौधरी ने कहा कि जहां भी AK-47 का इस्तेमाल हुआ है, वह गलत है और इसका समर्थन नहीं किया जा सकता।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "पूरा सिस्टम छात्रों के प्रति जानलेवा रवैया अपना रहा है। ऐसी खबरें आ रही हैं कि बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर AK-47 से फायरिंग की गई है और सैकड़ों लोगों पर FIR दर्ज की गई है।" उन्होंने आगे कहा, "दिल्ली में छात्रों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और बिहार में AK-47 का। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और दिल्ली हर जगह एक जैसा पैटर्न देखने को मिल रहा है।"

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा, "विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ AK-47 जैसे हथियारों के इस्तेमाल की क्या जरूरत थी? छात्र आतंकवादी नहीं हैं।" राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ पुलिस का व्यवहार अभूतपूर्व और निंदनीय रहा।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सिवान में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने AK-47 से फायरिंग की। उन्होंने कहा कि केवल एक कॉन्स्टेबल को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि फायरिंग का आदेश किसने दिया। उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की।

कांग्रेस सांसद मनोज तिवारी ने इस घटना को "बर्बर, अमानवीय और अत्याचारपूर्ण" बताया। वहीं पवन खेड़ा, मनोज झा समेत विपक्ष के कई नेताओं ने भी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है।

BJP ने विपक्ष के आरोपों को बताया भ्रामक

BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "क्या इस देश में पुलिस प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के लिए AK-47 का इस्तेमाल करती है? राहुल गांधी का यह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।" पात्रा ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य समस्याओं का समाधान निकालना नहीं, बल्कि विरोध-प्रदर्शनों के जरिए अराजकता का माहौल बनाना है।

वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शाम्भवी चौधरी ने कहा कि जहां भी AK-47 का इस्तेमाल हुआ है, वह गलत है और इसका समर्थन नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कई विरोध-प्रदर्शनों में असामाजिक तत्वों की मौजूदगी की बात सामने आई है और ऐसी स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी होता है।