सोनीपत

सोनीपत रेलवे स्टेशन पर ‘पाकिस्तानी जासूसी’ का भंडाफोड़, 18 दिनों तक प्लेटफॉर्म की लाइव फीड भेजता रहा खुफिया कैमरा

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Mar 18, 2026
Pakistani spying racket busted at Sonipat railway station

Sonipat: भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी सेंधमारी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोनीपत रेलवे स्टेशन पर एक खुफिया कैमरा लगाकर संवेदनशील जानकारियां सीमा पार भेजने का खुलासा हुआ है। यह कैमरा करीब 18 दिनों तक सक्रिय रहा और स्टेशन के सभी पांच प्लेटफॉर्मों की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहा था। गाजियाबाद पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की संयुक्त टीम बुधवार दोपहर मुख्य आरोपी प्रवीन को लेकर सोनीपत पहुंची और जांच के बाद इस जासूसी उपकरण को कब्जे में लिया।

सीधे पाकिस्तानी हैंडलर से जुड़ा था कनेक्शन

सूत्रों के अनुसार, पकड़े गए आरोपी प्रवीन ने कबूल किया है कि इस सीसीटीवी कैमरे की लाइव रिकॉर्डिंग सीधे एक पाकिस्तानी हैंडलर के मोबाइल पर जा रही थी। आरोपी ने गाजियाबाद में पकड़े गए एक बड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा होने की बात स्वीकार की है। जांच में सामने आया है कि हैंडलर व्हाट्सएप के जरिए निर्देश देकर संवेदनशील रेलवे प्रतिष्ठानों की फुटेज मंगवा रहे थे। प्रवीन को फिलहाल सात दिन के रिमांड पर लिया गया है, जिससे इस नेटवर्क के अन्य गुर्गों के बारे में पूछताछ की जा रही है।

दिल्ली कैंट में भी बिछाया था जाल

हैरानी की बात यह है कि सोनीपत ही नहीं, आरोपी ने दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर भी इसी तरह का खुफिया कैमरा लगाया था। हालांकि, वहां आरपीएफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे पहले ही बरामद कर लिया था। यह घटनाक्रम हाल ही में गाजियाबाद में पकड़े गए छह संदिग्धों के मामले से जुड़ा है, जो विदेशी ताकतों के इशारे पर भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर की जासूसी कर रहे थे।

प्रशासन की चुप्पी और सुरक्षा पर उठते सवाल

सोमवार को जब आरपीएफ ने ओएचई पोल (नंबर 42/27) पर इस संदिग्ध कैमरे को देखा, तो शुरुआती तौर पर इस पर केवल कपड़ा बांधकर रिकॉर्डिंग रोकने की कोशिश की गई। लेकिन इस गंभीर मामले में प्रशासन का ढुलमुल रवैया कई सवाल खड़े कर रहा है।

सुरक्षा में चूक, देरी और चुप्पी, तकनीकी रहस्य

26 फरवरी से लगा यह संदिग्ध कैमरा पूरे 18 दिनों तक प्रशासन की नजरों से कैसे बचा रहा, यह बड़ा सवाल खड़ा करता है। वहीं, दिल्ली से विशेषज्ञ टीम बुलाने में तीन दिन की देरी और अब तक आधिकारिक एफआईआर दर्ज न होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसके साथ ही तकनीकी पहलू भी साफ नहीं है कि कैमरा सिम आधारित था या वाई-फाई से संचालित, और उसका डेटा केवल लाइव ट्रांसमिट हो रहा था या मेमोरी कार्ड में भी स्टोर किया जा रहा था। फिलहाल जांच एजेंसियां इस संवेदनशील मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन इस घटना ने देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था और ऑडिट की जरूरत को फिर उजागर कर दिया है।

Published on:
18 Mar 2026 05:42 pm