बारां/जयपुर. राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की जांच में प्रदेशभर के 636 राशन डीलरों के यहां पोस मशीन रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक में 100 ङ्क्षक्वटल से अधिक गेहूं की कमी पाई गई। यह खुलासा मंगलवार को 16वीं राजस्थान विधानसभा के पांचवे […]
बारां/जयपुर. राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की जांच में प्रदेशभर के 636 राशन डीलरों के यहां पोस मशीन रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक में 100 ङ्क्षक्वटल से अधिक गेहूं की कमी पाई गई। यह खुलासा मंगलवार को 16वीं राजस्थान विधानसभा के पांचवे सत्र में हुआ, जब विधायक ललित मीना द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न का सरकार ने जवाब दिया।
सरकार ने बताया कि गंभीर गड़बड़ी पाए जाने पर 501 उचित मूल्य दुकानदारों को निलंबित किया गया है। जांच पूरी होने के बाद 394 राशन डीलरों के लाइसेंस (प्राधिकार पत्र) निरस्त कर दिए गए हैं। इन सभी मामलों का जिलेवार विवरण परिशिष्ट-1 के रूप में सदन की मेज पर रखा गया।
वसूली में सुस्ती, सवाल खड़े
गबन किए गए गेहूं की कीमत की वसूली के लिए विभागीय पत्र दिनांक 27 जनवरी 2021 के अनुसार पीडीआर एक्ट, 1952 के तहत प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसके बावजूद स्थिति यह है कि अब तक सिर्फ 21 राशन डीलरों से ही वसूली हो सकी है, जबकि दोषी डीलरों की संख्या सैकड़ों में है। वहीं, 244 राशन डीलरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। शेष मामलों में जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी बताई गई है।
संपत्ति कुर्की पर स्पष्ट रुख नहीं
विधानसभा में यह सवाल भी उठा कि जो डीलर गबन की राशि जमा नहीं करवा रहे हैं, उनकी संपत्ति कुर्क करने पर सरकार का क्या रुख है। जवाब में सरकार ने मौजूदा कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण और पीडीआर एक्ट के तहत वसूली की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन संपत्ति कुर्की को लेकर कोई अलग निर्णय या नई नीति घोषित नहीं की गई।
गरीबों के हक पर चोट
विशेषज्ञों का कहना है कि पीडीएस में इस तरह की अनियमितताएं सीधे तौर पर गरीब, श्रमिक और जरूरतमंद परिवारों को प्रभावित करती हैं, जिनका पूरा भरोसा सरकारी राशन प्रणाली पर होता है। ऐसे में सवाल यह भी है कि इतने बड़े पैमाने पर गबन के बावजूद वसूली और सजा की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है।
प्रदेश के कई जिलों में फैली गड़बड़ी
विभागीय आंकड़ों के अनुसार यह अनियमितता किसी एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अनेक जिलों में सामने आई है। राशन वितरण में यह कमी सीधे तौर पर गरीब व पात्र परिवारों के हक पर डाका माने जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार 100 ङ्क्षक्वटल से अधिक गेहूं की कमी प्रत्येक मामले में लाखों रुपए के सरकारी खाद्यान्न के गबन की ओर इशारा करती है। खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और इसके अंतर्गत लागू राजस्थान खाद्यान्न एवं अन्य आवश्यक पदार्थ (वितरण का विनियमन) आदेश, 1976 के तहत दोषी पाए जाने पर राशन डीलर का लाइसेंस निलंबित या निरस्त किया जा सकता है, प्रतिभूति राशि जब्त की जा सकती है, आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है। इन्हीं प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गई है।