सरिस्का क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच) के नए ड्राफ्ट में पालपुर व टहला क्षेत्र को बफर जोन में शामिल करने की तैयारी है।
अलवर. सरिस्का क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच) के नए ड्राफ्ट में पालपुर व टहला क्षेत्र को बफर जोन में शामिल करने की तैयारी है। सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रही टाइगर ट्रेल्स ट्रस्ट संस्था ने कहा है कि पालपुर व टहला एरिया आरक्षित जोन में हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर 2025 को जारी आदेश लागू होते हैं, जिसमें कहा गया है कि आरक्षित एरिया से छेड़छाड़ या मर्ज नहीं किया जा सकता। अब इस मामले में संस्था सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कांजीरंगा मामले की सुनवाई करते हुए पिछले साल 17 नवंबर को आदेश जारी किए थे। उसके बाद सीटीएच ड्राफ्ट का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। संस्था अध्यक्ष स्नेहा सोलंकी का कहना है कि नोटिफिकेशन से पालपुर, टहला आदि आरक्षित एरिया हटाते हुए नोटिफिकेशन जारी किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रशासन के समक्ष आपत्ति दायर की गई है, जिसे प्रशासन ने सुनवाई के लिए शामिल किया था। पालपुर, टहला आदि एरिया खानों से जुड़े हैं। ऐसे में एरिया बफर होने से खानों के खुलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
कमेटी पर भी उठाए सवाल
जिला कलक्टर की ओर से 4 मार्च को तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई। इस कमेटी में एडीएम द्वितीय अध्यक्ष बनाए गए। साथ ही कनिष्ठ उप विधि परामर्शी कलक्ट्रेट व खनि अभियंता सदस्य बनाए गए। यह कमेटी सीटीएच प्रकरण में ग्राम पंचायत से प्राप्त कार्रवाई विवरण, प्रस्तावित कार्रवाई के बाबत प्राप्त आपत्तियों, आपत्तियों पर डीएफओ सरिस्का से प्राप्त टिप्पणियों का अध्ययन कर जांच करेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना सुनिश्चित करेगी। वन्यजीव प्रेमी इस कमेटी पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि डीएफओ की टिप्पणियों की जांच करने के लिए कमेटी में वन विभाग के सीनियर अधिकारी को भी शामिल किया जाना चाहिए था या फिर टिप्पणियों को इस जांच से अलग रखना चाहिए।