अमरीका के डेटा में, मध्यम आयु वर्ग और बूढ़े लोग समय के साथ लगभग स्थिर दिखते हैं। युवा समूह, खासकर 25 साल से कम उम्र के, एक या दो दशक पहले के उसी उम्र के लोगों की तुलना में ज्यादा परेशानी महसूस करते हैं। यही व्यापक पैटर्न यू.के. और दर्जनों अन्य देशों में भी दिखता है।
जयपुर। खुशी के बारे में रिसर्च में एक पुरानी सोच यह थी कि लोग अपनी तीस की उम्र और चालीस की शुरुआत में ज़्यादा परेशान रहते हैं, और फिर सब ठीक हो जाता है। यह एक क्लासिक U-आकार का कर्व था, जिसमें जीवन के बीच में सबसे कम खुशी और बाद में सुधार देखने को मिलता था। सालों से इस थ्योरी को पढ़ाया और सुर्खियों में दिखाया जाता रहा है।
लेकिन, नए सबूत इस सोच को चुनौती देते हैं। एक नई स्टडी से पता चला है कि जीवन के बीच में होने वाली "नाखुशी की समस्या" अब कम हो गई है, और अब मानसिक परेशानी उम्र के साथ कम होने लगती है।
जीवन के बीच में तनाव कम हुआ
डार्टमाउथ कॉलेज के डेविड जी. ब्लैंचफ्लॉवर के नेतृत्व में एक टीम ने संयुक्त राज्य अमरीका, यूनाइटेड किंगडम और कई देशों के बड़े डेटा का विश्लेषण किया। ब्लैंचफ्लॉवर ने लिखा, "हम दिखाते हैं कि यह अनुभवजन्य (empirical) नियमितता अब उम्र के साथ मानसिक परेशानी में एक निरंतर कमी से बदल गई है।"
जीवन के बीच में परेशानी का स्तर कम इसलिए नहीं हुआ कि अचानक बूढ़े लोग बहुत खुश हो गए। यह बदलाव इसलिए हुआ क्योंकि युवा लोगों की मानसिक सेहत बाकियों के मुकाबले ज्यादा बिगड़ी है।
अमरीका के डेटा में, मध्यम आयु वर्ग और बूढ़े लोग समय के साथ लगभग स्थिर दिखते हैं। युवा समूह, खासकर 25 साल से कम उम्र के, एक या दो दशक पहले के उसी उम्र के लोगों की तुलना में ज्यादा परेशानी महसूस करते हैं। यही व्यापक पैटर्न यू.के. और दर्जनों अन्य देशों में भी दिखता है।
सर्वेक्षणों से मिला बदलाव का सबूत
टीम ने यू.एस. बीआरएफएसएस टेलीफोन सर्वे का उपयोग किया, जिसमें वयस्कों से पूछा जाता है कि पिछले 30 दिनों में उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए कितने दिन अच्छे नहीं थे। 1990 के दशक से, बीआरएफएसएस हर साल लाखों इंटरव्यू करता रहा है, जो ट्रेंड (प्रवृत्ति) के काम के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है, और मानसिक स्वास्थ्य दिनों से जुड़ा सवाल उनकी आधिकारिक प्रश्नावली में शामिल है। यू.के. के लिए, उन्होंने यूकेएचएलएस (जिसे अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी भी कहा जाता है) का उपयोग किया, जो लगभग 40,000 परिवारों पर नज़र रखता है। वहां मानसिक स्वास्थ्य को जीएचक्यू-12 (GHQ-12) के साथ मापा जाता है, जो 12-आइटम का एक स्केल है जिसका कुल 36 अंक होता है, जहां उच्च स्कोर अधिक परेशानी को दर्शाता है।
खुशहाली और परेशानी का पैटर्न
यह देखने के लिए कि क्या यह नया पैटर्न दुनिया भर में दिखता है, शोधकर्ताओं ने ग्लोबल माइंड्स प्रोजेक्ट का उपयोग किया, जो एमएचक्यू (MHQ) का उपयोग करके मानसिक कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करता है। यह मीट्रिक भावनात्मक, संज्ञानात्मक और सामाजिक क्षेत्रों में क्षमताओं को एक ऐसे पैमाने पर सारांशित करता है जो बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के साथ बढ़ता है। ये सर्वेक्षण व्यक्तिपरक (subjective) खुशहाली और उसके उलट, परेशानी को मापते हैं। उनका ध्यान किसी क्लिनिक में एक बार के निदान पर नहीं, बल्कि इस बात पर है कि लोग खुद को कैसा महसूस करते हैं और वे कैसे काम कर रहे हैं। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि नीतियां अक्सर धारणाओं और रोजमर्रा के अनुभव के आधार पर बनती हैं। जैसा कि लेखकों ने दिखाया है, स्व-रिपोर्ट किए गए मानसिक स्वास्थ्य में आयु प्रोफ़ाइल इस तरह से बदल गई है जो अन्य सामाजिक संकेतकों से मेल खाती है।
उम्र के साथ परेशानी कम होती है
पहले के डेटासेट में आमतौर पर रिपोर्ट की गई चिंता, तनाव और डिप्रेशन में एक उभार (hump) दिखाई देता था, जो जीवन के बीच में बढ़कर फिर कम हो जाता था। आज, यह रेखा उम्र के साथ एक स्थिर ढलान की तरह नीचे जाती दिखती है। युवा वयस्क अब मानसिक परेशानी के उच्चतम स्तर की रिपोर्ट करते हैं। बूढ़े समूह अपेक्षाकृत अधिक स्थिर दिखते हैं, जो शोधकर्ताओं और योजनाकारों के लिए तस्वीर को बदल देता है जिन्होंने मान लिया था कि जीवन का मध्य भाग परेशानी का चरम समय था। युवा लोगों में परेशानी के कारणों पर अभी भी बहस चल रही है। एक रिसर्च में पाया गया है कि अमेरिकी परिसरों में फेसबुक के आने से छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य खराब हुआ। महामारी से हुई रुकावटें, समय पर देखभाल न मिल पाना और आर्थिक दबाव भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। अध्ययन के लेखक पिछले दशक के इस ट्रेंड के लिए इन व्यापक शक्तियों को संभावित योगदानकर्ता बताते हैं।
युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य संकट
मृत्यु दर डेटा इस बात को स्पष्ट रूप से बताता है। 2020 में, संयुक्त राज्य अमेरिका में 10 से 34 साल की उम्र के लोगों में आत्महत्या मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण था। शिक्षा डेटा तनाव और पढ़ाई के नुकसान के बारे में एक संबंधित कहानी बताते हैं। बढ़ती अनुपस्थिति और स्कूलों में चिंता की रिपोर्ट किशोरों और युवा वयस्कों में अधिक परेशानी के व्यापक बदलाव से मेल खाती है।
परेशानी के बदलते पैटर्न
यह नया सबूत यह नहीं कहता कि बूढ़े लोग पूरी तरह से खुशहाल जीवन जीते हैं। यह उम्र के हिसाब से स्तरों में एक सापेक्ष बदलाव को उजागर करता है जो युवाओं के लिए चिंता बढ़ाता है। शोधकर्ता यह भी दावा नहीं करते कि इस बदलाव का कोई एक कारण है। सोशल मीडिया के प्रभाव, महामारी का प्रभाव, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और श्रम बाजार की समस्याएं सभी इसमें योगदान दे सकते हैं, और इसका असर समुदायों में अलग-अलग हो सकता है। यदि अब सबसे ज्यादा परेशानी युवाओं और शुरुआती वयस्कता में है, तो मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों को डेटा का पालन करना चाहिए। काउंसलिंग, स्कूल-आधारित सहायता, और प्राथमिक देखभाल के लिए प्रशिक्षण तक तेजी से पहुंच बहुत मदद कर सकती है। यह अध्ययन 'पीएलओएस वन' (PLOS ONE) नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।