अलवर

Rajasthan News: बैंक की नौकरी छोड़ लगाई फूड प्रोसेसिंग यूनिट, अब दूसरों को भी दे रहे रोजगार 

अलवर जिले के राजगढ़ कस्बे के निवासी अजीत शर्मा ने किसानों को सीधा बाजार और उचित मूल्य दिलाने की दिशा में सराहनीय पहल की है।
2 min read
Jan 05, 2026
Feature image
फूड प्रोसेसिंग यूनिट (फोटो - पत्रिका)

अलवर जिले के राजगढ़ कस्बे के निवासी अजीत शर्मा ने किसानों को सीधा बाजार और उचित मूल्य दिलाने की दिशा में सराहनीय पहल की है। उन्होंने अलवर के मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र (एमआईए) स्थित फूड पार्क में “एग्रो वाहिनी” नाम से आधुनिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की है। इस यूनिट के माध्यम से किसानों से आंवला सहित विभिन्न प्रकार की फल-सब्जियां व बागवानी उत्पाद सीधे खरीदे जा रहे हैं। इसके बाद इन उत्पादों की ग्रेडिंग की जाती है, जिसमें खराब, सही व सूखा आदि को अलग-अलग किया जाता है, फिर आकर्षक पैकेजिंग के साथ ग्राहकों को बेचा जाता है। यूनिट में कोल्ड स्टोरेज भी है। दाम सही नहीं मिलता, तो फल व सब्जियों को इसमें सुरक्षित रखा जाता है।

10 से 15 लोगों को रोजगार

अजीत बताते हैं कि आंवला किसान से खरीद कर उसे अलग-अलग करके सब्जी मंडी व बाजार में भेजा जाता है। सूखे आंवले की मांग आयुर्वेदिक प्रोडक्ट के लिए अधिक रहती है। उसे सीधा कंपनियों में भेजा जाता है। इस यूनिट में फिलहाल 10 से 15 लोगों को रोजगार मिल रहा है। यूनिट बनाने में जमीन खरीद से लेकर मशीन लगाने तक का करीब सवा करोड़ रुपए का खर्चा आया है। अजीत ने बताया कि यहां बागवानी फसलों के उत्पादन के बाद उनके प्रबंधन, प्रसंस्करण और वितरण की संगठित व्यवस्था विकसित की गई है। इससे किसानों को उत्पाद का सही दाम और बाजार तक सीधी पहुंच आसान हो गई है। पहले ईटाराणा छावनी के लिए मंडी से सब्जी खरीदी जाती थी। अब सब्जी सीधे ही यहां से पहुंचाई जाती है।

सीएम ने किया था सम्मानित

एग्रीटेक क्षेत्र में नवाचार करके जिले के युवाओं के लिए मिसाल पेश करने वाले अजीत शर्मा को पिछले दिनों जयपुर में आयोजित इनोवेशन-डे और स्टार्टअप कॉन्क्लेव-2025 में छह लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि देकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व उद्योग मंत्री ने सम्मानित किया था। पूर्व में कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर की ओर से भी अजीत को पांच लाख रुपए का चेक प्रदान कर सम्मानित किया गया था।

यों हुई शुरुआत

अजीत शर्मा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन किया है। वे बताते हैं कि एमबीए करने के बाद मैं बिजनेस करना चाहता था। किसानों के लिए कुछ करने की चाह थी। वे अपने परिवार में पहले व्यक्ति हैं, जो एंटरप्रन्योर बने हैं। अजीत बताते हैं कि मेरे पिता वीरेंद्र शर्मा बैंक से सेवानिवृत्त होकर राजगढ़ में रहते हैं। उनका नींबू, आंवला आदि फलों का बगीचा था। मंडी में कभी-कभी उपज ज्यादा आने के कारण उचित दाम नहीं मिल पाता था।

यही समस्या ज्यादातर किसानों के साथ थी। इसके निदान करने के लिए मैंने स्टार्टअप पर काम करना शुरू कर दिया। मैंने एक बैंक में 15 साल नौकरी की। फिर जॉब छोड़कर रीको से फूड पार्क में जमीन लेकर प्लांट शुरू किया। अजीत ने बताया कि हम ईटाराणा आर्मी स्टेशन में भी रेडी टू ईट, रेडी टू कुक फ्रूट और वेजिटेबल सप्लाई करते हैं।

Updated on:
05 Jan 2026 11:36 am
Published on:
05 Jan 2026 11:36 am