उक्त विद्यालय के प्राचार्य ने वर्ष 2024 में ही लिखित रिपोर्ट के माध्यम से सीबीओ कार्यालय राजगढ़, समसा कार्यालय चूरू और विधानसभा में प्रश्न के उत्तर में राजस्थान सरकार को स्कूल की जर्जर स्थिति से अवगत कराया था। इसके बावजूद आज तक एक भी नया कक्षा-कक्ष निर्माण नहीं किया गया, जो शिक्षा विभाग और सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
सादुलपुर. गत वर्ष मानसून में झालावाड़ की स्कूल इमारत के ढह जाने के हादसे के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया, लेकिन केवल जर्जर स्कूलों को कंडम घोषित कर ध्वस्त कर देने तक ही सीमित रह गया। निर्माण कार्य के नाम पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसका ताजा और दुखद उदाहरण सादुलपुर के गांव धानोठी छोटी में देखने को मिला। यहां के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल की पूरी बिल्डिंग जमींदोज कर दी गई है, लेकिन करीब 128 छात्र-छात्राओं के लिए आज तक एक भी कक्षा कक्ष नहीं बना। गांववासियों ने बताया कि 77वां गणतंत्र दिवस भी बच्चों ने खुले आसमान के नीचे मनाया, क्योंकि स्कूल की नई इमारत का सपना अभी भी अधर में है। ग्रामीणों और अभिभावकों की ओर से शिक्षा निदेशालय, सचिवालय और मंत्रालय को कम से कम 10 नए कक्षा-कक्ष और लाइब्रेरी निर्माण की अनेक बार लिखित मांग के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सरकार और विभाग खामोश
उक्त विद्यालय के प्राचार्य ने वर्ष 2024 में ही लिखित रिपोर्ट के माध्यम से सीबीओ कार्यालय राजगढ़, समसा कार्यालय चूरू और विधानसभा में प्रश्न के उत्तर में राजस्थान सरकार को स्कूल की जर्जर स्थिति से अवगत कराया था। इसके बावजूद आज तक एक भी नया कक्षा-कक्ष निर्माण नहीं किया गया, जो शिक्षा विभाग और सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। इस लापरवाही के चलते बच्चों की पढ़ाई अब भी असुरक्षित और असुविधाजनक स्थिति में है।
विधानसभा में उठी आवाज, पर सरकार मौन साधे खड़ी
विधायक मनोज न्यांगली ग्रामीणों की लगातार मांग के चलते इस मामले को सरकार के समक्ष उठाते रहे। जुलाई 2024 के विधानसभा सत्र में उन्होंने धानोठी के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल की नवीन बिल्डिंग निर्माण की मांग सदन में प्रस्तुत की। सदन पटल पर दिए गए सरकारी आश्वासन के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्कूल की संपूर्ण बिल्डिंग को जमींदोज कर दिए जाने के बाद विधायक ने वित्त मंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर आगामी बजट सत्र में नई बिल्डिंग निर्माण की घोषणा करने की मांग भी लिखित रूप में रखी है।
सरकार न चेती तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे
गांव के एडवोकेट हरदीप सिंह ने बताया कि आरटीई कानून के खंड 19 में साफ-साफ प्रावधान है कि बिना सुरक्षित स्कूल भवन के कोई भी सरकारी स्कूल संचालित नहीं किया जा सकता। छात्रों को सुरक्षित भवन उपलब्ध कराना लोक कल्याणकारी सरकार की कानूनी जिम्मेदारी है। कई बार लिखित में मांग करने के बावजूद सरकार ने कार्रवाई नहीं की, ऐसे में एमएचआरडी विभाग, भारत सरकार के दिशा-निर्देश और नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया-2005 के तहत सुरक्षित स्कूल भवन निर्माण के लिए माननीय राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
नया भवन जल्द
पहली से आठवीं तक के छात्रों को बालिया स्कूल में शिफ्ट किया गया है, जबकि नवमी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को विद्यालय भवन के सुरक्षित हिस्सों में बैठाया जा रहा है। विद्यालय की जर्जर हालत को देखते हुए, संस्था प्रधान से सुरक्षित बैठने का प्रमाण पत्र लिया गया है और बच्चों को क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में बैठने से प्रतिबंधित किया गया है। साथ ही, नए भवन के निर्माण के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। डॉक्टर सुमन जाखड़, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, सादुलपुर