
नई दिल्ली। बॉलीवुड पर राज़ करने वाले कपूर खानदान के दिग्गज एक्टर शशि कपूर इस दुनिया में नहीं रहे। मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में उनका आज शाम निधन हो गया। शशि कपूर पिछले काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे, जिसकी वजह से उनका निधन हो गया। वे 79 साल के थे, उनका जन्म 18 मार्च 1938 को कलकत्ता में हुआ था। शशि कपूर ने 1958 में ब्रिटेन की जेनिफर कैंडल से शादी की थी। उनके तीन बच्चे हैं जिनमें दो बेटे और एक बेटी हैं। बेटों में कुणाल कपूर और करण कपूर हैं तो वहीं उनकी बेटी का नाम संजना कपूर है।
शशि कपूर ने अपने फिल्मों से न जाने कितने लोगों की सोच बदल दी, उनकी तकदीर बदल दी और न जाने कितने लोगों के जीने का नज़रिया बदल दिया। उन्होंने बॉलीवुड इंडस्ट्री को नमक हलाल, दीवार, सुहाग, त्रिशूल, शान जैसी बड़ी ब्लॉकबस्टर्स दीं। उन्हें सिनेमा के सबसे बड़े पुरस्कार दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। इतना ही नहीं भारतीय सिनेमा को अपना सब कुछ देने वाले इस अभिनेता को भारत सरकार ने पद्म भूषण सम्मान से भी नवाज़ा।
शशि कपूर के कुछ फिल्मी डायलॉग्स ने लोगों की विचारधारा को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। उनके फैंस का मानना है कि शशि ने न सिर्फ उनकी सोच बदली बल्कि उनकी ज़िंदगी को भी बदलकर रख दिया। शशि कपूर के वैसे तो बहुत से डायलॉग्स काफी फेमस हैं। लेकिन हम यहां आपको उनके कुछ ऐसे डायलॉग्स बता रहे हैं, जिन्होंने लोगों के दिलों-दिमाग पर गहरा प्रभाव छोड़ा। उन्हीं में से कुछ हम नीचे लिख रहे हैं-
1. “हिंदू–मुस्लिम दो कौमों का नहीं, तारीख़ के एक दौर का नाम है। हिंदू-मुस्लिम इस देश की एक तहज़ीब, एक सभ्यता का नाम है। हिंदू-मुस्लिम इस धरती के उन दो बेटों का नाम है, जिनकी खुशी और गम, जिनका जीना और मरना एक है। ये दोनों एक थे, एक ही हैं और एक ही रहेंगे।”
2. “ज़माना देखते-देखते बदल जाता है, वो ज़मीं-आसमान, जहां कल मुहब्बत के नारे गूंजते थे, आज वहां नफरत के शोले भड़क रहे हैं। इंसान कितनी जल्दी बदल जाता है, कितनी जल्दी हर बात भूल जाता है।”
3. “धर्म आदमी को इंसान नहीं बनाता, इंसान को इंसान से लड़ाता है।”
4. “बंटवारा तो सगे भाइयों में भी होता है, मगर तलवार मारकर खून को खून से अलग नहीं किया जा सकता।”