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Shashi Kapoor dies: हमेशा हमेशा के लिए मुरझा गई बॉलीवुड की एक मोहक मुस्कान…

हमेशा हमेशा के लिए मुरझा गई बॉलीवुड की एक मोहक मुस्कान...
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Dilip Chaturvedi

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Updated: 4 Dec 2017, 7:04 PM IST

shashi kapoor

shashi kapoor

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शशि कपूर का सोमवार को निधन हो गया। वह 79 साल के थे। हिंदी फिल्म जगत में कई यादगार फिल्मों का हिस्सा रहे शशि कपूर काफी समय से बीमार थे। उन्होंने यहां एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। शशि कपूर के भतीजे मोहित मारवाह ने ट्विटर के जरिए उनके निधन की पुष्टि की। शशि कपूर, पृथ्वीराज कपूर के सबसे छोटे बेटे थे। साल 2011 में उन्हें पद्मभूषण से अलंकृत किया गया था।शशि कपूर का असली नाम बलबीर राज कपूर था। उन्होंने बतौर चाइल्ड एक्टर अपने भाई राज कपूर की फिल्म 'आवारा' और 'आग' में काम किया था। साल 2011 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था। साल 2015 में उन्हें 2014 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

18 मार्च 19३8 को जन्मे शशि कपूर उर्फ बलबीर राज कपूर ने 1944 में अपना करियर पृथ्वी थिएटर के नाटक 'शकुंतला' से आरंभ किया। राज कपूर की पहली फिल्म 'आग' और तीसरी फिल्म 'आवारा' में उन्होंने राज कपूर के बचपन की भूमिकाएं निभाने के बाद यश चोपड़ा के निर्देशन में फिल्म 'धर्मपुत्र' से हिंदी फिल्मों में एंट्री की। इसके पहले वह नाटकों में काम करते रहे।

Kapoor and sons... End of an era. #ShashiKapoor, most charming of them all. #Bollywood

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"मेरे पास धन है ,दौलत है ,बंगला है, गाड़ी है, तुम्हारे पास क्या है ? "अमिताभ के मुख से निकले सुपर हिट फिल्म 'दीवार' के इस संवाद के जवाब में " मेरे पास माँ है " कहने वाले शशि कपूर का चेहरा बरबस याद आ जाता है। बेशक मोहक मुस्कान बिखेरने वाले शशि कपूर, कपूर खानदान से जुड़े होने के बावजूद वो मुकाम हासिल नहीं कर पाए,जो आज अमिताभ को प्राप्त है , फिर भी सहायक अभिनेता के रूप में उनका चेहरा दर्शकों के जेहन में आज भी है।

बता दें कि शशि कपूर अपने समय के व्यस्ततम अभिनेताओं में से एक रहे हैं। सत्तर के दशक में शशि कपूर लगभग 150 फिल्मों के कॉन्ट्रेक्ट में थे। वह एक दिन में करीब ४-४ फिल्मों की शूटिंग में पहुंच जाते थे। इन्हीं दिनों राज कपूर सत्यम शिवम सुंदरम शुरू करना चाहते थे, लेकिन इसके लिए शशि बड़े भाई को डेट्स नहीं दे पा रहे थे, जिससे नाराज राज कपूर ने उन्हें टैक्सी का खिताब देते हुए था कि, 'शशि एक ऐसी टैक्सी है, जिसे जब बुलाओ आ तो जाता है, लेकिन मीटर हमेशा डाउन रहता है।' कपूर खानदान से ताल्लुक रखने के कारण ऐसा माना जा सकता है कि शशि कपूर का फिल्मों में आगमन काफी आसानी से हुआ होगा, लेकिन ऐसा है नहीं।

साल 1957 में कपूर जॉफरी केंडल की टूरिंग नाटक कंपनी को जॉइन करने के साथ शेक्सपियर के नाटकों में विभिन्न रोल अदा करने लगे। इसी दौरान जॉफरी केंडल की युवा बिटिया जेनिफर को उन्होंने नजदीक से देखा और वे प्यार की आंच में तपकर शादी के मंडप तक जा पहुंचे. कपूर खानदान में इस तरह की यह पहली शादी थी।