Inspiring Story: मेवाड़ की शौर्य धरा और त्याग के प्रतीक चित्तौड़गढ़ दुर्ग ने एक बालिका के हौसले से एक नया इतिहास बनते देखा है।
Inspiring Story: मेवाड़ की शौर्य धरा और त्याग के प्रतीक चित्तौड़गढ़ दुर्ग ने एक बालिका के हौसले से एक नया इतिहास बनते देखा है। जहां कभी वीरों की तलवारें खनकती थीं वहां आज एक 9 साल की नन्ही बालिका के स्केट्स के पहियों ने कामयाबी की नई इबारत लिख दी।
महज 9 साल की उम्र, पैरों में स्केटिंग शूज और आंखों में अजेय दुर्ग को फतह करने का सपना। महारानी पद्मिनी की धरती पर इस नन्ही जांबाज ने दुर्ग की कठिन और घुमावदार चढ़ाई को स्केटिंग करते हुए पार कर हर किसी को हैरत में डाल दिया है। गांधीनगर निवासी ज्वेलर्स दीपक सोनी की पुत्री आराध्या सोनी 7 साल की उम्र से ही स्केटिंग कर रही है। महज दो साल में उसने दुर्ग की चढ़ाई के साथ-साथ पूर्व में गांधीनगर सेक्टर एक मेनरोड़ अपने आवास से सेंती सांवलियाजी मंदिर छह किलोमीटर स्केटिंग की है।
दुर्ग की चढ़ाई किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं थी। पाडन पोल से शुरू हुआ रामपोल तक का यह सफर काफी घुमावदार और कठिन है। इसके बावजूद इस नन्हीं बिटिया के हौसले पत्थरों से भी मजबूत निकले। पसीने से तरबतर चेहरे पर थकान की जगह मंजिल पाने की चमक साफ नजर आ रही थी। रास्ते में मौजूद सैलानियों ने जब इस दृश्य को देखा तो हर कोई शाबाशी देता नजर आया।
अपनी इस साहसिक उपलब्धि के बाद नन्हीं चैंपियन आराध्या सोनी ने बड़ा संदेश दिया। उसने कहा कि लक्ष्य चाहे पहाड़ जैसा ऊंचा हो, अगर मन में विश्वास और पैरों में रफ्तार हो तो दुनिया की कोई भी चढ़ाई आपको रोक नहीं सकती है। मैं चाहती हूं कि हर बेटी बाहर निकले और अपनी प्रतिभा से आसमान छुए। अब बदलते वक्त में बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। बेटियों को अब भी परिवारजनों के सहयोग की सबसे ज्यादा आवश्यकता है।
आराध्या सोनी आगामी दिनों में अगले सफर में घर से 45 किलोमीटर दूर विख्यात सांवलिया सेठ मंदिर तक स्केटिंग करना चाहती है। इसमें प्रशासन और पुलिस की सहायता जरूरी है। आराध्या ने इसके लिए अभी से अभ्यास शुरू कर दिया है।