
श्रीगंगानगर.भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांव अब विकास की नई दौड़ में शामिल होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 योजना के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार कर इन्हें आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक रूप से मजबूत करने की तैयारी है। योजना के तहत राजस्थान के 184 सीमा गांवों में सडक़, बिजली, दूरसंचार, 4 जी मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। योजना में श्रीगंगानगर के 69, बीकानेर के 45, बाड़मेर के 36 और जैसलमेर के 34 गांव शामिल किए गए हैं।वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 का उद्देश्य केवल भौतिक ढांचे का विकास नहीं है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना भी है। योजना के तहत स्थानीय संसाधनों, पर्यटन, हस्तशिल्प और स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे और पलायन की समस्या कम होने की उम्मीद है। विकसित भारत वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत चयनित स्वयंसेवक जनजागरुकता, सामाजिक विकास और राष्ट्र निर्माण से जुड़े अभियानों में सहयोग करेंगे। साथ ही स्थानीय मेले, उत्सव, लोक कला और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर सडक़ और डिजिटल कनेक्टिविटी से शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। वहीं संचार सुविधाओं के विस्तार से सीमा क्षेत्रों में प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। ऐसे में यह योजना सीमावर्ती गांवों के लिए विकास और सुरक्षा के बीच एक मजबूत सेतु साबित हो सकती है।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के तहत श्रीगंगानगर जिले के 68 गांवों का चयन किया गया है। विभागीय गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक गांव के लिए लगभग तीन करोड़ रुपए के विकास कार्यों की योजना तैयार की जा रही है। यदि प्रस्तावित राशि मिल जाती है तो सीमावर्ती गांवों में विकास की तस्वीर बदल जाएगी।
-गिरधर, सीईओ, जिला परिषद, श्रीगंगानगर।