संयुक्त किसान मोर्चा व कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर बाजार बंद, एसडीएम कार्यालय के निकट लगाया धरना, मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
श्रीकरणपुर. संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर शुक्रवार को दोपहर तक बाजार बंद रहा। वहीं, एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना लगाया गया। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की ओर से भी इसे समर्थन दिया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने किसानों की मांगों को जायज बताते हुए केंद्र सरकार को जमकर कोसा। मांगों के संबंध में एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा गया।
जानकारी अनुसार संयुक्त किसान मोर्चा व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर दोपहर करीब १२ बजे तक बंद रहा। इस दौरान संयुक्त किसान मोर्चा व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना भी लगाया गया। धरने पर मुख्य वक्ता के रूप में विधायक रुपिंद्रसिंह कुन्नर ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की अनदेखी व उनके साथ दुश्मनों की तरह व्यवहार कर रही है। उनके रास्तों पर कीलें लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया जा रहा है। किसान आंदोलन के बाद बनी कमेटी दो साल भी फैसला नहीं कर पाई इसलिए मजबूरन किसानों को आंदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ किया जा रहा व्यवहार निंदनीय है। उन्होंने किसानों की मांगों को जायज बताते हुए इन्हें जल्द पूरा करने की मांग की। मौके पर किसान संगठनों से जुड़े केवल सिंह, दलबीर सिंह, सतविंद्र सिंह तीन ओ, पूर्व सांसद शंकर पन्नू, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बलकरणसिंह बराड़, पालिकाध्यक्ष रमेश बंसल, एसएफआइ जिलाध्यक्ष मुकेश मोहनपुरिया, गुरचरणसिंह बराड़, पूर्व प्रधान गुरदित्ता सिंह बराड़, पतराम मेघवाल, बलदेव सैन, दीपक अग्रवाल, दुलीचंद मित्तल, सुनील सोनी, जसवंतसिंह गोरखा, प्रदीप सुमन, प्रवीण दायमा व राजकुमार मोहनपुरिया आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इसके बाद विधायक के नेतृत्व में एसडीएम सुभाषचंद्र चौधरी को ज्ञापन सौंपा गया।
इन मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
जानकारी अनुसार संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में एमएसपी पर फसल खरीद का गारंटी कानून बनाने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश लागू करने, किसानों व श्रमिकों को कर्जमुक्ति का कानून बनाने, लखीमपुर खीरी में शहीद किसानों को न्याय दिलाने, हत्या के दोषियों को गिरफ्तार करने, बुजुर्ग किसानों व मजदूरों को पेंशन देने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, नई शिक्षा नीति रद्द करने, बिजली संशोधन विधेयक रद्द करने, मनरेगा में वर्षभर में दो सौ दिन काम व प्रतिदिन ७०० रुपए मजदूरी देने, बेरोजगारी पर अंकुश लगाने, शिक्षा, चिकित्सा, रेल, विद्युत, सडक़ आदि के निजीकरण पर रोक लगाने तथा किसानों की ऑनलाइन जमीन नीलामी रोकने की मांग की गई।