
ग्रामीणों ने डिस्कॉम अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नियमित विद्युत आपूर्ति की मांग की। Photo- Patrika
श्रीगंगानगर. जिले में 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान और भारी उमस के बीच बिजली कटौती ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढा दी हैं। पिछले तीन-चार दिनों से राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम के 220 केवी ट्रांसमिशन सिस्टम को ओवरलोड से बचाने के लिए रात्रि में एक-एक घंटे के अंतराल से कई कट लगाए जा रहे हैं। इससे हजारों ग्रामीण भीषण गर्मी और उमस के बीच अंधेरे में रात बिताने को मजबूर है। हालात से नाराज ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पहले जोधपुर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता कार्यालय और बाद में जिला कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया।श्रीगंगानगर के 220 केवी ग्रिड सब स्टेशन पर सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन से आने वाली 220 केवी विद्युत लाइनें इन दिनों क्षमता से अधिक लोड वहन कर रही हैं। प्रसारण निगम का कहना है कि सिस्टम की सुरक्षा और किसी बड़े तकनीकी फॉल्ट से बचने के लिए मजबूरी में रात्रिकालीन लोड मैनेजमेंट के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध बिजली कटौती की जा रही है। इसके अलावा फ्यूज उडऩा, लाइनों में फॉल्ट, ट्रांसफार्मरों में तकनीकी खराबी, बार-बार ट्रिपिंग और एलटी लाइनों के क्षतिग्रस्त होने जैसी समस्याएं भी बिजली आपूर्ति को प्रभावित कर रही हैं। इन तकनीकी दिक्कतों के कारण कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाती।
करणी मार्ग स्थित 132 केवी जीएसएस से जुड़े कालियां, खाटलबाना, दुल्लापुर कैरी और हिंदूमलकोट 33 केवी सब स्टेशनों से जुड़े गांवों में इस कटौती का सबसे अधिक असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बोर्ड क्षेत्र में 132 केवी लाइन से सीधी बिजली आपूर्ति जारी रहती है, जबकि 33 केवी फीडरों से जुड़े गांवों की सप्लाई बंद कर दी जाती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के साथ भेदभाव हो रहा है। किसान नेता संतवीर सिंह, जिला परिषद सदस्य सुखप्रीत सिंह, कालियां सरपंच पवनदीप सिंह, बॉबी पहलवान, जसा सिंह, अमृतपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने डिस्कॉम अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नियमित विद्युत आपूर्ति की मांग की। प्रदर्शन के दौरान अधीक्षण अभियंता नेमीचंद वर्मा कलक्ट्रेट में बैठक में होने के कारण नहीं मिले। इसके बाद प्रदर्शनकारी कलक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की। वहीं, कालियां जीएसएस पर बढ़ते लोड को देखते हुए पांच एमवीए का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है, जिससे भविष्य में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बिजली कटौती का असर केवल घरेलू जीवन तक सीमित नहीं है। पेयजल आपूर्ति, सिंचाई, डेयरी संचालन, छोटे उद्योग और दैनिक कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार बिजली आने-जाने से न तो पंखे चल पाते हैं और न ही मोटरों से पानी भर पाता है। रातभर बाधित रहने वाली आपूर्ति के कारण लोगों की नींद भी पूरी नहीं हो पा रही। लगातार कटौती से निगम के अधिकारियों के प्रति ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ती जा रही है।
राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम के 220 केवी रीको के अधिशासी अभियंता नरेश लालगढिय़ा ने बताया कि सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन से आने वाली 220 केवी लाइनें पिछले तीन-चार दिन से ओवरलोड चल रही हैं। सिस्टम को सुरक्षित रखने और किसी बड़े तकनीकी व्यवधान से बचने के लिए रात्रि में चरणबद्ध रूप से एक-एक घंटे की बिजली कटौती की जा रही है।
"कालियां जीएसएस पर स्थापित 3.15 एमवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर ओवरलोड चल रहा था। इस समस्या को देखते हुए एमडी से चर्चा कर तत्काल प्रभाव से वहां 5 एमवीए क्षमता का नया विद्युत ट्रांसफार्मर स्थापित कर दिया है। इससे काफी राहत मिलेगी।
के.के. कस्वां, मुख्य अभियंता, बीकानेर संभाग
Updated on:
07 Jul 2026 01:16 pm
Published on:
07 Jul 2026 12:40 pm
