
सर्दी का ‘सितम’ जारी, धूप पर ठंड भारी
पाले का प्रकोप जांचने के लिए विशेषज्ञ आक का पौधा देखने की सलाह देते हैं। इसके प्रभाव से आक का पौधा एक तरह से ‘खाक’ हो जाता है, झुलस जाता है
श्रीगंगानगर. क्षेत्र में सर्दी का ‘सितम’ जारी है। बुधवार को धूप तो निकली लेकिन बीच-बीच में चलती हवा के कारण ठण्ड इस पर भारी रही। न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस से कम रहा, अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक नहीं पहुंच सका।
सुबह जल्दी के समय धुंध का असर बाहरी इलाकों में देखा गया। वाहन लाइट जलाकर चलाए गए। पार्कों में सुबह-शाम नियमित घूमने वालों की संख्या में भी कमी आई है।
दोपहर में अच्छी धूप होने के कारण बच्चे पार्कों एवं मोहल्लों में खेलते नजर आए। बड़े-बुजुर्ग धूप सेकते तो कुछ लोग हथाई करते दिखे। दिन छिपने से पहले ही सर्दी का असर कुछ तेज हो गया तो पार्क एवं सडक़ें सूने-सूने हो गए।
अवकाश के बाद बुधवार को सरकारी कार्यालय खुले तो अपने काम के लिए आने वाले अनेक लोगों ने इनके बाहर चाय की थडिय़ों पर चाय पीकर सर्दी का असर कम करने की कोशिश की। कुछ लोग मूंगफली-गजक की रेहडिय़ों पर खड़े थे। सर्दी से बचाव के लिए स्वेटर, कोट आदि की दुकानों पर आने वालों की संख्या बढऩे से ग्राहकी में कुछ दिनों से तेजी आई है।
ताकि पाले से न पड़े पाला
- सरसों में विशेष सावधानी आवश्यक
श्रीगंगानगर. सरसों उत्पादक किसान इन दिनों यही दुआ कर रहे हैं कि पाले से पाला न पड़े। पाले का कहर एक नहीं बार अनेक बार इलाके में कहर बरपा चुका है। क्षेत्र में इन दिनों न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस के आस-पास चल रहा है, ऐसे में यह समय विशेष सावधानी वाला है।
कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. मिलिन्द सिंह के अनुसार तापमान चार डिग्री सेल्सियस से नीचे जाने पर पाले की आशंका बढ़ जाती है। दिन में तेज हवा शाम को अचानक बंद हो जाए तो उस रात पाले की आशंका पूरी रहती है। पाले से सरसों के उत्पादन एवं गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
पाले से बचाव के लिए सावधानी जरूरी है। इसके लिए फसल को पानी देना चाहिए। आस-पास के कई खेत वालों को सामूहिक रूप से धुआं कर सुरक्षा कवच बनाना चाहिए। सिफारिश के अनुसार गंधक का तेजाब भी इस्तेमाल करना चाहिए। नर्सरियों को बचाने के लिए भी विशेष सावधानी आवश्यक है।
जरूरत के हिसाब से आड़ या झांप का प्रबंध करना चाहिए। गेहूं, जौ एवं चना में भी इन दिनों जरूरत के हिसाब से सिंचाई, यूरिया आदि देने में सावधानी रखनी चाहिए।
आक होता ‘खाक’
पाले का प्रकोप जांचने के लिए विशेषज्ञ आक का पौधा देखने की सलाह देते हैं। इसके प्रभाव से आक का पौधा एक तरह से ‘खाक’ हो जाता है, झुलस जाता है। यूं लगता है जैसे जल गया हो। पाले की वजह से पौधे की कोशिकाओं का जल जमकर बर्फ बन जाता है। आयतन बढऩे से कोशिका की भित्ती फट जाती है और पौधा मर जाता है।
जिले में बुवाई----------(हे.)
सरसों---------------214546
गेहूं----------------- 231925
चना---------------- 133336
जौ-------------------57439