
चीनी का फाइल फोटो: पत्रिका
Sugar Price Update: चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने स्टॉक सीमा तय कर दी है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत चीनी (बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा) आदेश-2026 जारी किया है। इसके तहत बड़े उपभोक्ता अब 15 दिनों से अधिक का चीनी स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
श्रीगंगानगर जिला रसद अधिकारी कविता सिहाग ने बताया कि ऐसे बड़े उपभोक्ता, जो उत्पादन, उपभोग या उपयोग के लिए कच्चे माल के रूप में प्रतिमाह 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक चीनी का उपयोग करते हैं, उनके लिए 15 दिन की स्टॉक सीमा निर्धारित की गई है।
आदेश के तहत बड़े उपभोक्ताओं में मिठाई विक्रेता, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तथा अन्य संस्थागत खरीदार शामिल हैं। ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान चालू माह को छोड़कर पिछले एक वर्ष की औसत मासिक खपत के आधार पर की जाएगी। जिनकी औसत मासिक खपत कम से कम 10 मीट्रिक टन है, वे इस श्रेणी में आएंगे।
चीनी के थोक व्यापारियों और डीलरों के लिए अधिकतम 400 टन यानी 4,000 क्विंटल स्टॉक रखने की सीमा तय की गई है। वहीं, चीनी मिल से बिक्री के बाद किसी डीलर के परिसर में चीनी का स्टॉक सात दिन से अधिक नहीं रखा जा सकेगा।
श्रीगंगानगर जिले के सभी चीनी डीलरों को अपने स्टॉक से संबंधित जानकारी खाद्य विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर प्रतिदिन दर्ज करनी होगी। चीनी मिलों की ओर से बड़े उपभोक्ताओं को की गई मासिक बिक्री का भी सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए संबंधित एचएसएन कोड के माध्यम से जीएसटी रिटर्न में बिक्री का विवरण प्रस्तुत करना होगा।
पिछले एक पखवाड़े से रेट में हो रही बढ़ोतरी से कड़वी हो रही चीनी केन्द्र सरकार की ओर से प्रभावी कदम उठाए जाने के बाद मीठी होने लगी है। कमजोर मानसून के कारण उत्तरप्रदेश सहित गन्ना उत्पादक अन्य राज्यों में गन्ने की फसल कमजोर रहने की खबरों ने चीनी के रेट में बढ़ोतरी का तड़का लगाना शुरू कर दिया। इस दौरान यह अफवाहें भी उड़ी कि गन्ने से एथेनॉल बनाना शुरू करने से चीनी महंगी हो रही है। चीनी की बढ़ती हुई कीमतों और त्योहारी सीजन को देखते हुए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने का निर्णय करने के साथ कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक सीमा तय करने के साथ कड़े कदम उठाने का निर्णय किया तो चीनी के भावों में नरमी आनी शुरू हो गई।
श्रीगंगानगर में चीनी के भावों पर नजर डालें तो जुलाई में उपभोक्ता को चीनी 45 से 48 रुपए प्रति किलो की दर से मिल रही थी। इसमें तेजी का सिलसिला अगस्त के दूसरे सप्ताह में शुरू हुआ और यह 50 से 55 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। अभी 4-5 दिन पहले थोक में चीनी के भाव 68 रुपए प्रति किलो हुए तो उपभोक्ताओं के लिए चीनी 70 रुपए किलो हो गई। केन्द्र सरकार के फैसलों के बाद चीनी के रेट घटने शुरू हो गए हैं। मंगलवार को श्रीगंगानगर में चीनी के थोक भाव 68 से घटकर 63 रुपए प्रति किलो हो गए। पांच रुपए की गिरावट आते ही उपभोक्ताओं के लिए भी चीनी के भाव 70 रुपए से घटकर 65 रुपए प्रति किलो हो गए। बाजार का जो रुख है, उसके अनुसार चीनी के रेट में अभी और गिरावट आएगी।
नए प्रावधान 1 सितंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे। आदेश का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 एवं 7 के तहत माल जब्त करने के साथ लाइसेंस निरस्त करने जैसी कार्रवाई की जा सकेगी।
Updated on:
26 Aug 2026 02:10 pm
Published on:
26 Aug 2026 02:10 pm
