
जैतसर.
हिमाचल प्रदेश में शिवालिक की पहाडिय़ों से निकलते हुए राजस्थान के हनुमानगढ़ एवं श्रीगंगानगर जिले में करीब ढाई सौ किलोमीटर तक के विस्तृत क्षेत्र में बहने वाली, एवं कभी पवित्र सरस्वती नदी के बहाव का क्षेत्र रही जीबी क्षेत्र के लिए अमृतदायिनी घग्घर नदी में इस बार बरसाती पानी की कमी के चलते धान की फसल का बीजान करने वाले किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल सका। जीबी क्षेत्र के धान उत्पादक किसानों के लिए वरदान कहलाने वाली घग्घर नदी में इस बार लंबे समय तक बरसाती पानी नहीं आने के कारण यह नदी मात्र महीनेभर से भी कम समय में ही सूख गयी।
घग्घर में बरसाती पानी की कमी के कारण इस बार जीबी क्षेत्र के किसान पपर्याप्त मात्रा में घग्घर नदी के बरसाती पानी का सिंचाई पानी के रुप में उपयोग नहीं कर सके। कम समय तक बहाव के कारण किसान एक-दो बार ही धान की फसल में घग्घर के पानी का उपयोग कर सके। जिससे किसानों को धान की फसल में सिंचाई के लिए एक बार परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि क्षेत्र के किसानों के लिए अच्छी खबर यह है कि इस बार गंगनहर की करणीजी वितरिका में पर्याप्त सिंचाई पानी नियमित चल रहा है। जिससे फसलों को लाभ होने एवं अच्छा बीजान होने की उम्मीद है।
घग्घर का पानी धान के लिए अमृततुल्य-
जीबी क्षेत्र में धान का बीजान करने वाले किसान धर्मसिंह, वीर सिंह सेखों, गुरमीत सिंह सेखों, अमनदीप विडि़ंग सहित अन्य किसानों ने बताया कि धान की फसल के लिए घग्घर नदी का बरसाती पानी धान की फसल के लिए अमृत का काम करता है। पर्याप्त सिंचाई पानी नहीं मिलने एवं तेज गर्मी व उमस के कारण जब किसानों की धान की फसल सूखने लगती हो तो ऐसे समय में घग्घर नदी का बरसाती पानी धान का बीजान करने वाले किसानों के लिए किसी अमृत से कम नहीं होता। घग्घर में पानी ऐसे समय आता है जब किसानों को धान की फसल में सिंचाई के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। बरसात के पानी में आवश्यक रसायन एवं विटामिन्स होने के कारण भी यह फसलों के लिए लाभदायक माना जाता है।
प्रदेश में दौ सौ पचास किलोमीटर का है बहाव क्षेत्र
घग्घर बाढ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार घग्घर नदी का कुल प्रवाह क्षेत्र करीब छह सौ से सात सौ किलोमीटर तक का है। यह नदी राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी तहसील के गांव तलवाड़ा झील से प्रवेश करते हुए हनुमानगढ़ व पीलीबंगा, श्रीगंगानगर जिले की सूरतगढ़ तहसील, श्रीविजयनगर एवं अनूपगढ़ तहसील से होते हुए पाकिस्तान में प्रवेश कर जाती है। श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिले में करीब दौ सौ पचास किलोमीटर तक के प्रवाह स्थल में यह नदी हजारों बीघा कृषिभृमि को सिंचित करती है। जून-जुलाई में उतर भारत में होने वाली बरसात के बाद प्रतिवर्ष जुलाई महीने के प्रथम सप्ताह से इसमें बरसाती पानी का बहाव प्रारंभ हो जाता है जो किसानों एवं उनकी फसलों को जीवन देने का काम करता है। जीबी क्षेत्र के किसान एवं सहकारी भूमि विकास बैंक के चैयरमैन इन्द्रजीत सिंह रंधावा, किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव हरदीप सिंह विडि़ंग एवं सरदारगढ़ के किसान रोहिताश बिश्नोई ने बताया कि उतर भारत में अच्छी बरसात होने के बाद कभी-कभी तो घग्घर नदी में अक्टूबर महीने तक भी बरसाती पानी का प्रवाह बना रहता है।
ओ टू हैड से नहरें निकालने के बाद कम होता गया पानी- क्षेत्र के प्रगतिशील किसान रोहिताश बिश्नोई ने बताया कि किसी समय घग्घर नदी में इतना अधिक बरसाती पानी आता था कि उसे नियंत्रित करना बड़ा मुश्किल होता था। जिससे बाढ के भी हालात बन जाते थे। वर्ष 1988 एवं 1995 में घग्घर में आये अत्यधिक बरसाती पानी के कारण हनुमानगढ़ एवं श्रीगंगानगर जिले में भारी बाढ आ गयी थी। लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से ओ टू हैड से छह नहरें निकालने एवं घग्घर के बरसाती पानी को वहीं रोक लेने के बाद से ही जिले में घग्घर नदी का बहाव बहुत कम हो गया। बीते कुछ वर्षों में घग्घर नदी में बहुत कम पानी अल्पसमय के लिए ही आ रहा है। जिससे किसानों के माथे की चिंता की लकीरें बढती जा रही है।