
श्रीगंगानगर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गुडबुक में कहे जाने वाले केन्द्रीय राज्य मंत्री और बीकानेर के सांसद अर्जुनराम मेघवाल की अब मुश्किलें बढऩे वाली है। यदि यह विरोध ऐसा ही बढ़ा तो उनका हर मंच पर चौतरफा विरोध होना लाजिमी है।
पूर्व मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता देवी सिंह भाटी की अगुवाई में रविवार को जीनगर धर्मशाला में एससी आरक्षण से वंचित जाति चिन्तन वर्ग की बैठक में मेधवाल समाज के लोगों को बार बार टिकट दिए जाने का विरोध किया गया।
इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए भाटी का कहना था कि पूरे प्रदेश में दलित वर्ग की 58 जातियां है लेकिन मेघवाल समाज को ही लोकसभा चुनाव में टिकट मिलती है, ऐसे में इसी वर्ग के अन्य जातियों मे यह कमशकश पिछले साठ सालों से चल रही है।
भाटी का कहना था कि केन्द्रीय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को जिन 36 बिरादरियों ने मान सम्मान से चुनाव जितवाया था उनको तवज्जो तक नहीं दी। सिर्फ मेघवाल समाज पर बजट खर्च किया। उन्होंने बताया कि वे हर मंच पर अर्जुन राम को खिलाफत करते रहेंगे।
श्रीगंगानगर से चुनाव लडऩे की अटकलों के संबंध में भाटी का कहना था कि यदि मेघवाल इस इलाके में चुनाव लडऩे आए तो वे भी यहां उनके खिलाफ ताल ठोक देंगे।
भाटी का कहना था कि सामाजिक न्याय मंच की मुहिम के तहत वर्ष 1998 को उन्होंने आरक्षित को संरक्षित और वंचित को आरक्षण की मुहिम चलाई थी। इसका परिणाम अब सर्वणों को दस प्रतिशत आरक्षण से मिल गया है। लेकिन एससी आरक्षण में सिर्फ मेघवाल समाज को ही भाजपा और कांग्रेस दोनों तवज्जो देती है, जबकि वोटों की संख्या इन अन्य 58 जातियों के वोटर अधिक है।
मेघवाल समाज टिकट का ही हकदार नहीं हो सकता, वह भी एक ही परिवार के सदस्यों को चाहे वे पंचायत समिति प्रधान, जिला परिषद डायरेक्टर या विधायक या लोकसभा चुनाव में मांगे।
अब बदलते परिवेश में लोगों ने अन्य जातियों को प्राथमिकता दी है, इसका परिणाम है कि अनूपगढ़ में बावरी समाज, रायसिंहनगर में रामदासिया, मेड़ता में बावरी समाज से विधायक चुने गए है। इस मीटिंग में जीनगर समाज के प्रधान आशाराम डाबी, शंकर असवाल, बाबूलाल निर्वाण, राजेश निर्वाण, शिवलाल सैन, पार्षद रवि चौहान, सुभाष गहलोत, पूर्व विधायक शिमला बावरी आदि मौजूद थे।