
श्रीगंगानगर.
मृतकों के आश्रितों के नाम पर शस्त्र लाइसेंस ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में अनपढ़ व्यक्तियों के लिए अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। प्रशासन ने इस मामले में जो प्रक्रिया अपनाई है उसमें अनपढ़ व्यक्तियों को शस्त्र रखने के लिए अयोग्य पाया गया है। जिला कलक्टर के निर्देश पर मृतक के आश्रितों के नाम शस्त्र लाइसेंस जारी करने के लिए जिले भर में आवेदन मांगे गए थे। जिले में करीब पौने दो सौ व्यक्तियों ने आवेदन किया।
प्रशासन की ओर से इन व्यक्तियों के लिए पुलिस लाइन में हथियार चलाने का प्रशिक्षण देने के लिए बकायदा शिविर लगाए गए। फरवरी माह में 7, 14 और 21 तथा मार्च माह में 7, 14 और 21 मार्च को कुछ छह शिविर लगे। इन कैम्पों में हर ग्रुप में 25-25 व्यक्तियों को शामिल किया गया। सातवां कैम्प अब 4 अप्रेल को लगाया जाएगा। मृतक के आश्रितों के नाम शस्त्र लाइसेंस ट्रांसफर करने के लिए कुछ महिलाओं ने भी आवेदन किए। पुलिस लाइन में लगे शस्त्र चलाने के प्रशिक्षण में कुछ महिलाओं ने कामयाबी हासिल की। इन सभी के लिए बाद में लिखित परीक्षा भी हुई।
इसमें शस्त्र और उसे चलाने के बारे में प्रश्न पूछे गए, लेकिन अनपढ़ होने के कारण छह व्यक्ति परीक्षा पास नहीं कर पाए। प्रशासन अब इन्हें शस्त्र चलाने और उसे रखने के लिए योग्य नहीं मान रहा है। इस कारण संबंधित शस्त्र लाइसेंस मृतक के आश्रितों के नाम नहीं चढ़ पा रहे हैं। इस बात की जानकारी इन अनपढ़ व्यक्तियों को भी लग गई है। वे अपने स्थान पर किसी अन्य के नाम अब शस्त्र लाइसेंस ट्रांसफर करवाने के इच्छुक है, लेकिन प्रशासन फिलहाल इनके आवेदन स्वीकार नहीं कर रहा है।
बरती जा रही है गोपनीयता
श्रीगंगानगर जिले में वर्ष 2007 में टोपीदार बन्दूकों के लाइसेंस को दोनाली बन्दूक के लाइसेंस रूप में परिवर्तित करने के घोटाले के सामने आने के बाद दो आरएएस अधिकारियों तथा कलक्ट्रेट के पांच कर्मचारियों पर गाज गिरी थी। इस मामले को लेकर छह अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जांच एसओजी ने की थी। एसओजी की जांच के दौरान कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए थे। इस जांच के बाद जिले में हथियारों के लाइसेंस की संख्या और उनके उपयोग करने वालों के नामों को लेकर आज भी गोपनीयता बरती जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी खुले रूप में इस मामले के बारे में कुछ भी कहने को तैयार नहीं।
नौ हजार से अधिक है शस्त्र लाइसेंस
श्रीगंगानगर जिले में नौ हजार से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं। इनमें से 90 प्रतिशत शस्त्र एक नाल और दो नाल (दोनाली बन्दूक) हैं। एक नाल को एसबीबीएल और दो नाल बन्दूक को डीबीबीएल के नाम पर जाना जाता है।
यानि सिंगल बोर और डबल बोर। शेष 10 प्रतिशत अन्य हथियारों में पिस्टल, माऊजर, रिवाल्वर और राइफल शामिल हैं। इनके अलावा कई किसानों को टोपीदार बन्दूक के भी लाइसेंस दिए हुए हैं। इनके लाइसेंस उपखण्ड मुख्यालयों पर एसडीएम की ओर से जारी किए जाते हैं।
टोपीदार बन्दूक के लाइसेंस केवल किसानों को दिए जाते हैं। इससे वे फसल की सुरक्षा और जंगली जानवर को डराने के लिए धमाके के रूप में इस्तेमाल करते हैं। टोपीदार बन्दूक के लाइसेंस पर बकायदा बारूद की मात्रा अंकित होती है।