Imprisonment for ten years for torturing a child unnaturally- चार साल पहले श्रीविजयनगर थाने में दर्ज हुआ था मामला.
श्रीगंगानगर. अपहरण कर सात वर्षीय बालक से अप्राकृतिक यौन प्रताडि़त करने के जुर्म में अदालत ने एक जने को दोषी मानते हुए दस साल कठोर कारावास व बीस हजार रुपए जुर्माने की सजा से दंडित किया है। यह निर्णय पोक्सो कोर्ट संख्या दो अरुण कुमार की अदालत ने सुनाया।
विशिष्ट लोक अभियोजक नवप्रीत कौर ने बताया कि 9अक्टूबर 2017 को पीडि़त बालक के पिता और माता श्रीविजयनगर थाने में पेश हुए और पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। इसमें बताया कि 8 अक्टूबर 2017 को उसके घर पर एक शादी का कार्यक्रम चल रहा था, इस दौरान डीजे साउण्ड पर परिवारिक सदस्य खुशी का इजहार करते हुए नाच रहे थे। इस दौरान उसका सात वर्षीय बेटा एकाएक गायब हो गया।
करीब एक घंटे बाद उसका बेटा रोता हुआ आया और उसने बताया कि गजसिंहपुर थाना क्षेत्र चरणौली गांव के चक १ एफएफबी निवासी मामराज पुत्र भीखाराम नायक ने उसे जबरदस्ती उठाकर खेतों की अेार से ले गया और वहां उससे कुकर्म किया। इस पर सभी एकत्र हुए तो मामराज भी आकर माफी मांगने लगा लेकिन इस आरोपी के कृत्य के खिलाफ पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने उसी समय बालक का मेडिकल मुआयना कराया और आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। जांच के बाद पुलिस ने इस आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया।
अदालत ने शुक्रवार को आरोपी मामराज को दोषी मानते हुए आईसीपी की धारा 363 में तीन साल कठोर कारावास व पांच हजार रुपए जुर्माना और लैंगिंग अपराधों से बालकों का सरंक्षण अधिनियम की धारा 5 एम और धारा 6 में दस साल कठोर कारावास व बीस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना राशि अदा नहीं करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।