ठेकेदार के बिल भुगतान के एवज में बीस हजार रुपए की रिश्वत लेने के जुर्म में अदालत ने तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता को दो साल कारावास से दंडित किया है।
श्रीगंगानगर.
ठेकेदार के बिल भुगतान के एवज में बीस हजार रुपए की रिश्वत लेने के जुर्म में अदालत ने जल संसाधन विभाग खण्ड रामसिंहपुर के तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता को दो साल कारावास व दस हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है।वहीं, सहयोगी आरेापित बेलदार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। यह निर्णय मंगलवार को भ्रष्टाचार निवारण मामलों की स्पेशल कोर्ट ने सुनाया।
अपर लोक अभियोजक पवन जोशी ने बताया कि भादरा क्षेत्र के गांव गांधीबड़ी निवासी नंदलाल पुत्र दुन्नीराम जाट ने हनुमानगढ़ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो चौकी के समक्ष शिकायत की थी। इसमें बताया गया कि उसकी मैसर्स करणीजी डिस्ट्रीब्यूटी फर्म जल संसाधन विभाग में ठेकेदार है। उसने रामसिंहपुर के पास पुल और सड़क निर्माण का ठेका 35 लाख रुपए में लिया है। विभाग ने उसे 8 लाख 75 हजार रुपए का भुगतान चैक से किया है। लेकिन, जल संसाधन विभाग खण्ड रामसिंहपुर का कनिष्ठ अभियंता बीकानेर की कांता कथूरिया कॉलोनी निवासी राजाराम पुत्र गौरीशंकर और सहायक अभियंता श्रवण कुमार 43 हजार रुपए रिश्वत मांग रहे हैं। वह कनिष्ठ अभियंता राजाराम को दस हजार रुपए दे भी चुका है लेकिन शेष राशि के लिए फोन कर रहे हैं।
इस पर ब्यूरो ने 30 मई 2009 को जेईएन राजाराम और परिवादी नंदलाल के बीच फोन पर हुई की रिकॉर्डिंग कर ट्रैप का जाल बिछाया। ब्यूरो टीम के साथ परिवादी रामसिंहपुर के लिए रवाना हुई।रास्ते में फोन पर जेएइन ने खुद के बजाय बेलदार रामसिंहपुर कैनाल कॉलोनी निवासी राजेन्द्र सिंह को भेज दिया। उसने यह राशि ली तो ब्यूरो ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इधर, ट्रेप की भनक लगते ही जेईएन राजाराम भाग गया। हालांकि बाद में उसे ब्यूरो टीम ने गिरफ्तार कर लिया।
बेलदार ने खुद नहीं मांगी थी रिश्वत
बेलदार के संबंध में बचाव पक्ष का कहना था कि जेईएन के आदेश पर ही बेलदार पुल पर पहुंचा था। बेलदार खुद ने कभी रिश्वत नहीं मांगी। इस पर अदालत ने बेलदार को बरी कर दिया।