
Sriganganagar Honeybee Attack - AI PIC
राजस्थान में श्रीगंगानगर के जवाहरनगर इलाके में स्थित प्रसिद्ध इंदिरा वाटिका पार्क में शनिवार सुबह उस समय अचानक भारी अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई, जब पार्क के एक पेड़ पर बने मधुमक्खियों के बड़े छत्ते पर क्रिकेट की एक गेंद जाकर जोर से टकरा गई। गेंद लगते ही छत्ते से हजारों की संख्या में मधुमक्खियां बाहर निकल आईं और उन्होंने पार्क में टहल रहे और व्यायाम कर रहे लोगों पर हमला बोल दिया। इस अचानक हुए हमले से सुबह के समय पार्क में मौजूद लोगों के बीच अपनी जान बचाने की होड़ मच गई। घटना के दौरान कई लोगों को मधुमक्खियों ने बुरी तरह से डंक मारकर घायल कर दिया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि समय रहते लोग पार्क से बाहर भागने में सफल रहे, जिससे कोई जनहानि या अत्यंत गंभीर हादसा होने से टल गया। इस घटना ने अब शहर के सार्वजनिक पार्कों में सुरक्षा मानकों और खेल गतिविधियों के संचालन को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों और पार्क में नियमित रूप से आने वाले स्थानीय नागरिकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे का समय था, जो कि आमतौर पर पार्कों में सबसे ज्यादा भीड़भाड़ का समय माना जाता है। इस दौरान श्रीगंगानगर के इंदिरा वाटिका में करीब 200 से अधिक लोग मौजूद थे, जिनमें बड़ी संख्या में बुजुर्ग, घुटनों के दर्द से परेशान लोग, महिलाएं और छोटे बच्चे शामिल थे। कुछ बुजुर्ग पार्क के बेंचों पर बैठकर आपस में सामाजिक और राजनैतिक चर्चा कर रहे थे, जबकि युवा और महिलाएं ट्रैक पर वॉक कर रही थीं।
इसी दौरान पार्क के एक खाली पड़े हिस्से में कुछ स्थानीय निवासी अपने बच्चों के साथ वीकेंड का आनंद लेते हुए क्रिकेट खेल रहे थे। खेल के दौरान ही एक खिलाड़ी ने बल्ले से एक तेज शॉट हवा में खेला। यह गेंद सीधे जाकर एक ऊंचे पेड़ की शाखा पर बने मधुमक्खियों के घने छत्ते से टकरा गई। गेंद के सीधे प्रहार से छत्ता पूरी तरह से हिल गया और उसमें रहने वाली मधुमक्खियों का पूरा झुंड आक्रामक होकर बाहर आ गया।
छत्ते से बाहर निकलते ही मधुमक्खियों के झुंड ने सीधे नीचे मौजूद इंसानों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया। जैसे ही लोगों ने भिनभिनाती हुई मधुमक्खियों को अपनी तरफ बढ़ते देखा, पूरे इंदिरा वाटिका पार्क में चीख-पुकार मच गई और हड़कंप जैसी स्थिति पैदा हो गई। पार्क का शांत माहौल चंद सेकंड के भीतर एक डरावने दृश्य में बदल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि स्थिति इतनी भयावह थी कि जिस व्यक्ति को जिधर भी पार्क का निकास द्वार या सुरक्षित कोना दिखाई दिया, वह अपनी उम्र और शारीरिक क्षमता को भूलकर उधर ही दौड़ पड़ा। पार्क में मौजूद महिलाओं ने खुद को और अपने छोटे बच्चों को मधुमक्खियों के डंक से बचाने के लिए अपने दुपट्टों और पल्लुओं से चेहरों व हाथों को पूरी तरह से ढंक लिया। कई बुजुर्ग टहलते-टहलते सड़क की तरफ भागे। इस भगदड़ में कुछ लोग जमीन पर भी गिर गए, जिन्हें अन्य लोगों ने संभाला।
इस पूरे घटनाक्रम में कई नागरिकों को मधुमक्खियों ने शरीर के अलग-अलग हिस्सों जैसे चेहरे, हाथ और गर्दन पर डंक मार दिए, जिससे उन्हें तेज जलन और सूजन की शिकायत हो गई। घटना के तुरंत बाद घायल लोग अपने-अपने स्तर पर पार्क से बाहर निकले और उन्होंने पास के निजी चिकित्सकों और क्लीनिकों में पहुंचकर प्राथमिक चिकित्सा सहायता ली, जहां उन्हें डंक निकालने और दर्द निवारक इंजेक्शन व दवाइयां दी गईं।
इस संबंध में जब स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र से जानकारी ली गई, तो श्रीगंगानगर के जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में इस घटना से जुड़ा कोई भी मरीज इलाज के लिए नहीं पहुंचा था। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि चूंकि लोगों को प्राथमिक स्तर के डंक लगे थे, इसलिए किसी को भी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत नहीं आई और सभी घायलों की स्थिति पूरी तरह से खतरे से बाहर और सामान्य बनी हुई है।
इंदिरा वाटिका में सुबह-सुबह हुए इस बड़े सुरक्षा हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय राजनीति और सामाजिक संगठन भी पूरी तरह से सक्रिय हो गए। क्षेत्र के पूर्व पार्षद संदीप शर्मा तुरंत मौके पर पहुंचे और उन्होंने पार्क में मौजूद लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से घटना की पूरी जानकारी ली। नागरिकों के गुस्से और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए पूर्व पार्षद ने तुरंत एक प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रशासनिक अधिकारियों का रुख किया।
संदीप शर्मा ने श्रीगंगानगर नगर परिषद के आयुक्त, जिला प्रशासन के आला अधिकारियों और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। ज्ञापन में मांग की गई है कि इंदिरा वाटिका सहित श्रीगंगानगर शहर के तमाम छोटे-बड़े सार्वजनिक पार्कों के भीतर सुबह और शाम के समय क्रिकेट, फुटबॉल या किसी भी अन्य भारी खेल गतिविधियों के खेलने पर तुरंत प्रभाव से कानूनी रोक लगाई जाए।
पूर्व पार्षद संदीप शर्मा और जवाहरनगर के नागरिकों ने अपने ज्ञापन में पार्कों के उपयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण तकनीकी और सामाजिक बिंदु उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नगर परिषद द्वारा पार्कों का निर्माण मुख्य रूप से शहर के बुजुर्गों के स्वास्थ्य लाभ, महिलाओं की सैर, योग क्रियाओं और छोटे बच्चों के मनोरंजन व ताजी हवा खाने के लिए किया जाता है। पार्क किसी भी प्रकार के खेल का मैदान नहीं होते हैं।
नागरिकों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से शहर के कई पार्कों में कुछ युवाओं और गैर-जिम्मेदार लोगों द्वारा सुबह और शाम के व्यस्त समय में लेदर, कॉर्क या भारी प्लास्टिक की गेंदों से क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया जाता है। इस वजह से पार्क में वॉक करने आने वाले बुजुर्गों को हमेशा यह डर सताता रहता है कि कहीं कोई तेज गेंद आकर उनके सिर या पैर पर न लग जाए। पूर्व में भी कई बार तेज गेंदों के कारण टहल रहे लोगों के चोटिल होने के मामले सामने आ चुके हैं और शनिवार को मधुमक्खियों का यह हमला इसी लापरवाही का एक सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष प्रमाण है।
Updated on:
31 May 2026, 8:48 AM IST
Published on:
31 May 2026, 8:18 AM IST
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