
श्रीगंगानगर.
नगर परिषद प्रशासन ने प्रेमनगर और बलवंत सिंह ढाणी के आसपास चंद मकान मालिकों को सुविधा देने के नाम पर बाईस लाख रुपए खर्च कर दिए। मुख्य नाले का निर्माण कराया जा रहा है लेकिन इस पानी की निकासी आगे कहां और कैसे होगी और पानी का निस्तारण किस प्रकार होगा, यह प्लानिंग बनाई ही नहीं है। नाला निर्माण का आदेश नगर परिषद प्रशासन ने श्री विनायक कंस्ट्रक्शन ठेका फर्म को दिया है, इस पर करीब बाईस लाख रुपए का बजट खपाने की तैयारी है।
इस ठेकेदार ने नाले निर्माण में भी गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा है। यहां तक कि पुरानी और घटिया ईंटों से नाला का निर्माण की लगातार शिकायतों के बावजूद नगर परिषद की निर्माण शाखा ने चुप्पी साध ली है। वार्ड 29 और कुछ भाग वार्ड 20 में समाहित होने के कारण जनप्रतिनिधियों की एप्रोच बढ़ती देख परिषद के अभियंताओं ने शिकायतों को नजर अंदाज कर दिया है। आलम तो ये है कि ठेकेदार भी जनप्रतिनिधियों के आगे नतमस्तक है।
इसलिए बनाया निर्माण का आधार
नई धानमंडी से गंदा पानी पंडित बलवंत सिंह की ढाणी में खाली पड़ी भूमि पर आता है। इस भूमि के आसपास कई खाली भूखण्ड भी है, वहां यह पानी खड़ा रहने से बदबू मारने लगता है। खासतौर पर गर्मियों में अधिक समस्या आती है। इस पर चंद कोठियों के मालिकों ने वार्ड के पार्षदों से इस समस्या को हल करने की बात कही, इन मालिकों में कांग्रेस के पदाधिकारी और अधिवक्ता भी है। ऐसे में सभापति ने आश्वासन दिया कि समस्या का स्थायी समाधान करा दिया जाएगा। पार्षदों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए एस्टीमेट बनाने के आदेश करवा लिए, निर्माण शाखा से गुपचुप टेंडर करवा लिए।
शिकायत के बावजूद अभियंताओं ने बताया दुरुस्त
इस संबंध में जब जागरूक नागरिकों ने नगर परिषद प्रशासन से शिकायत की तो वहां जेईएन सिद्धार्थ जांदू को मौके पर भेजा। जेईएन के वहां पहुंचने से पहले ही सिफारिशी फोन की घंटिया बज चुकी थी। ऐसे में जेईएन ने जांच किए बिना निर्माण जारी रखने की रिपोर्ट आयुक्त और सभापति को दे दी। जेईएन का कहना था कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कमी नहीं है। कमी पाए जाने पर ठेकेदार का भुगतान रोका जाएगा।