
श्रीगंगानगर.
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की अदालत ने लोन की एनओसी देने के नाम पर एक रात के लिए लडक़ी व सात हजार रुपए की रिश्वत मांगने वाले मरूधरा ग्रामीण बैंक घडसाना के तत्कालीन प्रबंधक कृष्ण जीनगर को तीन साल सजा व बीस हजार रुपए जुमार्ने की सजा सुनाई है।ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार दो केआरकेएम कुंडल घडसाना निवासी खेतराम पुत्र कृष्ण बावरी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में फरवरी 2009 में शिकायत दर्ज कराई कि उसके पिता ने मरूधरा ग्रामीण बैंक से लोन लिया था।
जिसमें 45 हजार जमा करवा दिए और शेष सरकार की ओर से माफ कर दिए गए। इससे उसका बैंक लोन निल हो गया। इस दौरान बैंक के तत्कालीन प्रबंधक कृष्ण जीनगर पुत्र गोपीलाल ने उसके पिता के नाम फर्जी नोटिस भेज दिया, जिसमें लोन के 75 हजार रुपए बकाया बताए गए। इस पर परिवादी बैंक पहुंचा और वहां तत्कालीन बैंक प्रबंधक कृष्ण जीनगर से मिला। ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार दो केआरकेएम कुंडल घडसाना निवासी खेतराम पुत्र कृष्ण बावरी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में फरवरी 2009 में शिकायत दर्ज कराई कि उसके पिता ने मरूधरा ग्रामीण बैंक से लोन लिया था।
बैंक प्रबंधक उसको 80 हजार रुपए जमा कराने के लिए कहा। इस पर उसने लोन पूरा होने की बात कही। तो वह नहीं माना। लोन को निल करने के लिए बैंक प्रबंधक ने सात हजार रुपए रिश्वत व एक रात के लिए लडक़ी की मांग की। ब्यूरो की टीम ने इस मामले का सत्यापन कराया तो रिश्वत में सात हजार रुपए मांगना सही पाया गया। 9 फरवरी 2009 को ब्यूरो की टीम ने तत्कालीन बैंक प्रबंधक कृष्ण जीनगर को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में ब्यूरो की अदालत ने मंगलवार देर शाम को आरोपित को तीन साल की सजा व बीस हजार रुपए जुमार्ने की सजा सुनाई। 9 फरवरी 2009 को ब्यूरो की टीम ने तत्कालीन बैंक प्रबंधक कृष्ण जीनगर को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया था।