
श्रीगंगानगर।
ग्राम पंचायतों में सुरक्षा गार्ड के पद पर कार्यरत युवाओं को न्यूनतम मजदूरी को दो, बीए और बीएड धारक इन युवकों को प्लेसमेंट एजेंसी की बजाय जिला परिषद खुद अनुबंध से संविदा कर्मी के रूप में काम कराएं।इससे सुरक्षा गार्ड को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। यह कहना था पंचायतीराज सुरक्षा गार्ड संघ का। इस संगठन के पदाधिकारियों की अगुवाई में शुक्रवार को जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्राम मीणा के समक्ष गुहार लगाई गई। इस दौरान ग्राम पंचायत अरायण के सुरक्षा गार्ड जितेन्द्र शर्मा को अकारण हटाने के संबंध में राजस्थान हाईकोर्ट की रोक के संबंध में अदालत के आदेश की प्रतिलिपि भी पेश की गई।
संगठन प्रदेशाध्यक्ष पपेन्द्र कुमार का कहना था कि सुरक्षा गार्ड जितेन्द्र शर्मा की डयूटी ग्राम पंचायत अरायण के अटल सेवा केन्द्र पर एक दिसम्बर को लगाई गई थी, लेकिन ग्राम पंचायत ने अगले दिन ही उसे वहां से हटा दिया।इस संबंध में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई तो तत्काल हटाने पर रोक लगाने के आदेश किए गए है। सुरक्षा कर्मियों का कहना था कि कागजों में डयूटी आठ घंटे की है लेकिन काम बारह से चौदह घंटे करवाया जा रहा है।
यहां तक कि जिन प्लेसमेंट एजेसिंयों के माध्यम से यह नियुक्तियां की गई है, उनको मानदेय भी 5300 रुपए मासिक की बजाय साढ़े तीन हजार रुपए ही मिल रहा है। बिचौलियों की परपंरा समाप्त कर जिला परिषद खुद अनुबंध के आधार पर नियुक्तियां की जाएं ताकि हकदार को उसको मेहनताना पूरा मिल सके। इस मौके पर जिलाध्यक्ष कालूराम, गगनदीप सिंह, गुरचरण सिंह, गोपालराम, रणजीत सिंह, कृष्णलाल, रामचन्द्र आदि मौजूद थे।