
hospital ward
श्रीगंगानगर.
सेवारत्त चिकित्सक संघ के आह्वान पर सात दिन से श्रीगंगानगर सहित राज्य भर में डॉक्टर हड़ताल पर है। जिला चिकित्सालय,पीएचसी और सीएचसी के अधिकांश वार्डों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ओपीडी और आईपीडी में रोगी आते हैं लेकिन डॉक्टर नहीं मिलते हैं। इस कारण रोगी निजी चिकित्सालय में उपचार करवाने को मजबूर है। वहां पर रोगी से मनमर्जी से उपचार के नाम पर राशि वसूली जा रही है जबकि राजकीय जिला चिकित्सालय सहित जिले भर में अधिकांश वार्डों में कोई रोगी नहीं है। वहां पर कुछेक मरीज भर्ती है इनका उपचार डॉक्टर की बजाए नर्सिंग कर्मचारी कर रहे हैं। चिकित्सालय में पिछले सात दिन से सोनाग्राफी नहीं हो रही है और ना ऑपरेशन हो रहे हैं। रोगी की कहीं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
अधिकांश डॉक्टर हुए भूमिगत
श्रीगंगानगर जिले में पीएचसी-सीएचसी और जिला चिकित्सालय में 187 डॉक्टर कार्यरत है। इनमें सीएमएचओ व पीएमओ सहित 31 डॉक्टर्स ही जिले में ड्यूटी पर है। इनमें सीएमएचओ के अधीन जिले में 123 डॉक्टर है जिनमें से 104 डॉक्टर हड़ताल पर है वहीँ जिले की 56 पीएचसी और 16 सीएचसी में 19 डॉक्टर से ही काम चलाया जा रहा है। जिला चिकित्सालय में 64 डॉक्टर है इनमें पीएमओ डॉ.सुनीता सरदाना सहित 12 डॉक्टर ड्यूटी पर है। गिरफ्तारी के डर से जिला चिकित्सालय के नौ डॉक्टर मेडिकल अवकाश पर है और 16 दिसंबर से डॉ.पवन सैनी न्यायिक अभिरक्षा में है लेकिन उनकी तबीयत खराब होने की वजह से वे आईसीयू में भर्ती है। इसके अलावा जिले के अन्य डॉक्टर पिछले एक सप्ताह से भूमिगत हैं।
ओपीडी में हो रही है खानापूर्ति
पीएमओ डॉ.सुनीता सरदाना का कहना है कि 21 दिसंबर को जिला चिकित्सालय में 856 ओपीडी थी और 152 मरीज भर्ती थे। इनमें 43 नए मरीज भर्ती हुए। पांच सामान्य प्रसव हुए और एक व्यक्ति की मौत हुई है। इसके अलावा 87 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है। वहीं, 22 दिसंबर को शाम छह बजे तक 723 मरीज ओपीडी में जांच करवाने के लिए आई और 27 नए रोगी भर्ती हुए हैं। लेकिन इन मरीजों की जांच कर दवा देने में खानापूर्ति हो रही है। पिछले एक सप्ताह से सोनोग्राफी नहीं हो रही है और दवा काउंटर हो, या अन्य जगह सब जगह सन्नाटा छाया हुआ है।
Published on:
22 Dec 2017 08:00 pm
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