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श्रीगंगानगर.
अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आह्वान पर चिकित्सकों के आंदोलन का असर रोगियों पर साफ नजर आ रहा है।दोनों पक्ष अपनी बात पर अड़े हैं, न तो राज्य सरकार रोगियों के प्रति सहानुभूति दिखा रही और न ही चिकित्सकों को ही इससे कोई सरोकार है। दोनों पक्षों के संघर्ष में रोगी परेशान हो रहे हैं। आलम यह है कि प्रतिदिन करीब आठ सौ से अधिक रोगी आ रहे हैं, लेकिन उन्हें मिलते हैं महज खाली कक्ष। इससे रोगियों को दुखी होकर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
खाली रही ओपीडी
राजकीय जिला चिकित्सालय में शुक्रवार को ओपीडी के कमरे खाली रहे। दंत रोग विभाग, चर्म रोग विभाग, सर्जिकल विभाग, नेत्ररोग विभाग, ईएनटी की ओपीडी सहित विभिन्न विभागों का आलम यही रहा। यदि काउंटर का आंकड़ा देखें तो 834 रोगी चिकित्सालय पहुंचे, लेकिन इन रोगियों में से अधिकांश को उपचार नहीं मिल पाया। रोगी प्राय: एक से दूसरे वार्ड में चक्कर काटते और डॉक्टरों के बारे में पूछते नजर आए। आपातकालीन व्यवस्था में जरूर डॉक्टर की व्यवस्था रही जिससे रोगियों की परेशानी कुछ कम हुई।
एक डॉक्टर तीन काम
राजकीय जिला चिकित्सालय में डॉ.हरमिंद्र सिंह एक साथ तीन काम देंखते नजर आए। जहां एक ओर वे ब्लड बैंक में सेवाएं देते हैं, साथ ही मेडिकल ज्यूरिस्ट के रूप में उनकी सेवाएं ली जा रही हैं तथा साथ ही गुरुवार को उन्होंने अस्थि रोग विभाग में भी रोगियों की जांच की। इसके अलावा अन्य डॉक्टरों की भी यही स्थिति है। ऐसे में रोगियों को उपचार कम ही मिल पा रहा है। इसके साथ ही गुुरुवार को 23 नए रोगी भी चिकित्सालय में भर्ती हुए ।
वार्ड हुए सूने
चिकित्सालय का रजिस्ट्रेशन काउंटर अब लगभग सूना है। इसके साथ ही अधिकांश वार्डों में बड़े हिस्से में रोगी नजर नहीं आ रहे हैं। इन वार्डों के कर्मचारियों ने बताया कि डॉक्टर केवल राउंड के लिए अथवा कॉल पर ही उपलब्ध हो पाते हैं। इसके अलावा अधिकांश व्यवस्थाएं नर्सिंग कर्मी संभालते हैं, वहीं आउटडोर में तो डॉक्टर नजर ही यदा कदा ही आते हैं।
Published on:
21 Dec 2017 09:27 pm
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