श्री गंगानगर

विकसित होंगे मोलश्री, आरुकेरिया और सल्फेरा के पौधे

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विकसित होंगे मोलश्री, आरुकेरिया और सल्फेरा के पौधे

वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थियों को मिलेगी प्रायोगिक कार्य की सुविधा


श्रीगंगानगर.

मोलश्री, रुहिलिया, अमलताश, साइकस, बोतलपाम और ऐसे ही कई खूबसूरत पौधे अब शहर के डॉ.भीमराव अंबेडकर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विकसित होंगे। जी हां, शहर के इस सरकारी कॉलेज ने निजी महाविद्यालयों की तर्ज अपने यहां वानस्पतिक उद्यान यानी बोटेनिकल गार्डन विकसित करने की शुरुआत की है। इसके लिए करीब पच्चीस तरह के खूबसूरत और वनस्पति विज्ञान के प्रायोगिक कार्यों में उपयोग होने वाले पौधे यहां लगाए जाएंगे।

इन पौधों की देखभाल के लिए कर्मचारियों को विशेष दायित्व दिए गए हैं। पौधे लगातार विकसित हों और उनका लाभ विद्यार्थियों को मिले इसके लिए कॉलेज के व्याख्याताओं को इसकी देखरेख पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। वे वनस्पति विज्ञान के अनुरूप पौधों की देखरेख के लिए कर्मचारियों को दिशा निर्देश देंगे।


उजाड़ था वानस्पतिक उद्यान
कॉलेज में पिछले कई वर्ष से वानस्पतिक उद्यान उजाड़ पड़ा था। विज्ञान ब्लॉक से सटे वानस्पतिक उद्यान में पौधों के स्थान पर झाड़ झंखाड़ उग आए थे जिन्हें हटवाकर बाद में साफ करवा दिया गया। पुराना वानस्पतिक उद्यान देखभाल के अभाव में बिलकुल बेकार हो चुका था। राजस्थान पत्रिका में पिछले दिनों इस संबंध में समाचार प्रकाशित होने के बाद कॉलेज प्रशासन चेता और महाविद्यालय के मुख्यद्वार के ठीक सामने वानस्पतिक उद्यान विकसित करने का निर्णय किया गया। विकास समिति की बैठक में इस बाबत निर्णय कर करीब 95 हजार रुपए के पौधे मंगवाने का तय किया गया। इसमें से कुछ राशि के पौधे मंगवा लिए गए हैं।

ये लगेंगे पौधे
कॉलेज के वनस्पतिशास्त्र व्याख्याता राजेंद्र कड़वासरा के अनुसार कॉलेज के वानस्पतिक उद्यान में अशोक, अर्जुन, विल्वपत्र, कटहल, अमलताश, अश्वगंधा, गुड़हल, तुलसी श्यामा, मरहुआ, हारशृंगार, मोलश्री, रुहिलिया, फाइकस ब्लैक, फाइकस गोल्ड, फाइकस पांडा, बोतल पाम, साइकस, फोनिक्स पाम, हिकोमा पाम, रबड़ पादप, ग्वारपाठा, आरुकेरिया, सल्फेरा और गुलाब की अलग-अलग किस्में लगाई जाएंगी।


कॉलेज में वानस्पतिक उद्यान शीघ्र विकसित हो जाएगा। इसके लिए पौधे मंगवा दिए गए हैं। इन पौधों को लगवाया गया है। इससे वनस्पतिशास्त्र के प्रायोगिक कार्य में सहयोग मिलेगा। इसकी देखभाल के लिए कर्मचारियों को दायित्व दिया गया है।
-डॉ.रामसिंह राजावत, प्राचार्य, डॉ.भीमराव अंबेडकर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, श्रीगंगानगर

Published on:
31 Jul 2018 08:32 am