
बोर्ड परीक्षा में अब सत्रांक भेजने में नहीं होगी गड़बड़ी
-शिक्षा विभाग बोर्ड के परिणाम व सत्रांक के प्रतिशत में अंतर होने पर स्कूल की जांच करवाएगा
-सत्रांक भेजते समय संस्था प्रधान को देना होगा सैंपल, मिलान का प्रमाण पत्र भी देना होगा
पत्रिका एक्सक्लूसिव- श्रीगंगानगर. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में सत्रांक भेजने में स्कूल अब गड़बड़ी नहीं कर सकेंगे। उन्हें स्थानीय परीक्षाओं में आए वास्तविक अंकों के आधार पर ही विद्यार्थियों के सत्रांक भेजने होंगे। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने निगरानी की कड़ी व्यवस्था कर दी है। इसके तहत अब डाइट स्टाफ कभी भी स्कूल में जाकर परीक्षार्थियों की कापी की जांच कर सकेंगे। बाहरी परीक्षक की व्यवस्था के साथ विद्यार्थियों के सत्रांक व बोर्ड परीक्षा के अंकों में बड़ा अंतर होने पर भी स्कूल की जांच होगी। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक बीकानेर आशीष मोदी ने सभी सरकारी व निजी स्कूलों के संस्था प्रधानों को निर्देश जारी इसके लिए पाबंद किया गया है।
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यूं भेजे जाते हैं सत्रांक
शिक्षा विभाग के एडीइओ वेद प्रकाश जलंधरा ने बताया कि कक्षा 10 वीं व 12 वीं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थी का परिणाम सैद्धांतिक, प्रायोगिक व विद्यालय स्तर के सत्रांक मिलाकर जारी होता है। इसमें गैर प्रायोगिक विषय परीक्षा में बोर्ड की अंतिम परीक्षा के अंक के 20 प्रतिशत तथा प्रायोगिक विषयों के लिए प्रायोगिक परीक्षा के अंक कम करने के बाद शेष अंक के 20 प्रतिशत सत्रांक भेजने का प्रावधान है। इसमें 10 फीसदी अंक स्कूल स्तर के तीन टेस्ट व अद्र्धवार्षिक परीक्षा के पांच फीसदी प्रोजेक्ट कार्य, तीन फीसदी विद्यार्थी की उपस्थिति और दो प्रतिशत अंक उसके व्यवहार और अनुशासन के होते हैं।
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पालना करनी होगी
डाइट चूनावढ़ के प्राचार्य व डीइओ गिरजेशकांत शर्मा का कहना है कि संस्था प्रधान को हर परीक्षा व परख के बाद हर विषय की दो प्रतिशत कॉपियों की जांच व सत्रांक से मिलान कर प्रमाण पत्र देना होगा। डाइट स्टाफ कभी भी स्कूल जा कर कॉपियों की जांच कर उसके नंबरों का सत्रांक से मिलान कर सकता है। इसके लिए स्कूलों को तीन साल तक टेस्ट व अद्र्धवार्षिक परीक्षा के उत्तर पुस्तिकाएं सुरक्षित रखनी होगी। सत्रांक भेजने से पहले संस्था प्रधान उस पीइइओ परिक्षेत्र के अन्य शिक्षक को बाहरी परीक्षक के रूप में बुलाएंगे, जो अंकों का मिलान कर विषय अध्यापक व संस्था प्रधान के साथ हस्ताक्षर सहित प्रमाण पत्र देंगे कि विद्यार्थियों के सत्रांक अद्र्धवार्षिक परीक्षा में प्राप्त अंकों के अनुपात में ही है।
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बोर्ड ने मानी-हो रही गड़बड़ी
सत्रांक भेजने में स्कूलों की गड़बड़ी को खुद निदेशालय ने भी स्वीकार किया है। निदेशक ने निर्देशों में भी लिखा है कि सत्रांक की सत्यता और वस्तुनिष्ठता को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। विद्यार्थी के सत्रांक की तुलना में सैद्धांतिक परीक्षा में कम अंक आ रहे हैं। इसे देखते हुए ही जांच व्यवस्था शुरू की जा रही है।
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अंतर 50 प्रतिशत से अधिक होने पर होगी जांच
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दूसरी ओर सैद्धांतिक परीक्षा में 80 में से 30 अंक यानि 38.75 प्रतिशत। सत्रांक में 90 प्रतिशत और सैद्धांतिक में 38.75 प्रतिशत और दोनों में अंतर 50 प्रतिशत से अधिक होने पर ही यह प्रकरण जांच योग्य बनेगा।
पहले सभी रिक्त पद भरे जाने चाहिए
कक्षा 10 वीं, 12 वीं के अधिकांश छात्रों को वर्ष भर विषय अध्यापक नहीं मिले। शिक्षकों के गैर शैक्षणिक कार्यों के कारण कक्षा में समयबद्ध नहीं जा पाए। ऐसे में सत्रांक संबंधी जारी परिपत्र न्यायोचित नहीं है।
सुरेश विश्नोई, जिलाध्यक्ष, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ रेस्टा, श्रीगंगानगर
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माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान अजमेर ने एक परिपत्र जारी किया है। इसकी अनुपालना में माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने बोर्ड परीक्षा में आंतरिक मूल्यांकन के अंकों के सत्यापन एवं प्रबोधन के लिए समस्त सरकारी व निजी संस्था प्रधानों को पाबंद किया गया है।
पन्ना लाल कड़ेला,सीडीइओ,शिक्षा विभाग,श्रीगंगानगर।