इलाके के करीब डेढ़ हजार से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्र के पंजीकृत बच्चों के फर्जीवाड़ा थम नहीं आ रहा है। महिला सुपरवाइजर अपने हिसाब से जांच करती है।
श्रीगंगानगर.
इलाके के करीब डेढ़ हजार से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्र के पंजीकृत बच्चों के फर्जीवाड़ा थम नहीं आ रहा है। महिला सुपरवाइजर अपने हिसाब से जांच करती है। जांच में सबकुछ सही होने का दावा किया जाता है लेकिन हकीकत जुदा है। जितने बच्चे प्रत्येक केन्द्र पर पंजीकृत है, उसके अनुरुप उपस्थिति नहीं होती। अब महिला एवं बाल विकास विभाग ने एेसे बच्चों को आधार कार्ड से आन लाइन की प्रकिया से जोडऩे की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इससे एेसे बच्चों के मनमाफिक आंकड़ों का खेल थम सकेगा। इधर, विभाग ने केन्द्र की कार्यकर्ता, सहायिका और आशा सहयोगिनों के आधार कार्ड से ऑनलाइन कर दिया है।
विभाग का दावा है कि प्रत्येक केन्द्र में सुपरवाइजर की जांच जरूर होती है, इसकी बकायदा फोटो अपलोड कर जयपुर स्थित निदेशक की देखरेख में बने वट्सअप गु्रप में बकायादा प्रेषित की जाती है ताकि यह पता चल सके कि किस सुपरवाइजर ने कौन कौन सा केन्द्र चैक किया है।
इससे ये होंगे फायदा
बच्चों की सूची ऑनलाइन होने से पोषाहार का सही आंकड़ा सामने आ सकता है। अब तक केन्द्र में पंजीकृत बच्चों के अंाकड़े के अनुरुप ठेका देने वाले सप्लायर स्वयं सहायता समूह को बांटा रहा है, एेसे में ऑनलाइन सिस्टम होने से पोषाहार की सप्लाई मनमर्जी से नही हो पाएगी। इसके अलावा नामांकित बच्चों का सही आंकलन हो सकेगा।
केस-एक
पुरानी आबादी आंगनबाड़ी केन्द्र में पिछले दिनों सुपरवाइजर ने जांच की तो वहां पंजीकृत १९ में से महज चार बच्चे ही उपस्थित नजर आए। इस केन्द्र पर कई बार जांच हो चुकी है लेकिन उपस्थित बच्चों की संख्या औसतन पांच रही है।
केस-दो
पदमपुर क्षेत्र में दो आंगनबाड़ी केन्द्रों को जांचा तो वहां एक केन्द्र पर ताला तो दूसरे केन्द्र पर गिनती के आठ बच्चे मौजूद मिले थे। इन दोनों केन्द्रों की हकीकत भी अलग नहीं है, औसतन यहां भी बच्चें पंजीकृत के मुकाबले कम आते है।
केस-तीन
यूआईटी के पास मॉडल कॉलोनी स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र में बुधवार को सुबह सवा ग्यारह बजे गिनती के बच्चे आए और चले गए। सन्नाटा इतना पसरा था कि वहां कार्यकर्ता अपना टाइमपास करती नजर आर्ई।