श्री गंगानगर

पंजाबी बोली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान और संस्कृति का है हिस्सा

पंजाबी बोली के महत्व को उजागर करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन
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Updated: 6 Oct 2024, 6:50 PM IST
पंजाबी बोली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान और संस्कृति का है हिस्सा
अनूपगढ़. भाग लेने वाले पंजाबी समुदाय से जुड़े पदाधिकारी।

अनूपगढ़ .शहर के एक निजी महा विद्यालय ने रविवार को पंजाबी भाषा विकास समिति की तरफ से पंजाबी बोली की महत्ता को उजागर करने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में श्री गुरु ग्रंथ साहिब प्रकाश पर्व पर आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। विभिन्न वर्गों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान, पिछले 2 वर्षों में पंजाबी विषय पढ़ाने वाले सरकारी अध्यापकों को भी उनके योगदान के लिए सराहा गया। समिति के संस्थापक प्रोफेसर कुलदीप सिंह के द्वारा पंजाबी भाषा के विस्तार के बारे में चर्चा की गई।

राज्य सरकार से की जाएगी मांग

इस अवसर पर प्रकाश सिंह जोसन ने बताया कि विद्यालयों में लेवल 2 पंजाबी तथा वरिष्ठ अध्यापक पंजाबी के पद स्वीकृत है, कुछ विद्यालयों में पंजाबी के पद स्वीकृत नहीं है। जल्दी ही उन्हें भी स्वीकृत करवाने प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के समक्ष मांग रखी जाएगी की प्राध्यापक के पद भी जिन विद्यालयों में पंजाबी बाहुल्य है अर्थात पंजाबी के विद्यार्थी ज्यादा है वहां स्वीकृत किया जाए ताकि प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में भी पंजाबी के विद्यार्थियों को लाभ मिले। कार्यक्रम में हरविंदर सिंह,रुपिंदर कौर, गुरचरण सिंह थिंद,रवि कुमार,लक्ष्मण, सोमेंद्र सिंह, दिलबाग सिंह, अटल शर्मा, सहायक आचार्य गुरप्रीत सिंह खालसा सेवा ग्रुप के गगनदीप सिंह सुखमण सिंह, जशनदीप सिंह ने भाग लिया।

अखरकारी पंजाबी सुलेख का वितरण

समिति द्वारा इस अवसर पर अखरकारी पंजाबी सुलेख की एक पुस्तक का वितरण भी किया गया। यह पुस्तक विद्यार्थियों की लिखाई को सुधारने और उन्हें पंजाबी बोली में दक्ष बनाने के उद्देश्य से बनाई गई है। वक्ताओं ने इस पुस्तक के महत्व को बताते हुए उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे अपनी पंजाबी बोली को अपनाएं और उसे आगे बढ़ाएं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सरदार कुलदीप सिंह गिल ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, पंजाबी बोली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान और संस्कृति का हिस्सा है। इसे जीवित रखने का कार्य हम सभी का है। हरदेव सिंह ने भी सभी उपस्थित लोगों को अपनी मातृभाषा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा बलदेव सिंह जोसन ने समिति के वार्षिक कैलेंडर का परिचय देते हुए आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि कुलदीप सिंह असिस्टेंट प्रोफेसर,मलकियत सिंह, प्रकाश सिंह जोसन, जरनैल सिंह जम्मू, जतिन सुथार, दर्शन सिंह सहोता, बलविंदर सिंह चहल, जरनैल सिंह जोसन, प्रिंसिपल रविंद्र सिंह जीत सिंह, गुरजंट सिंह मौजूद रहे।

Updated on:
6 Oct 2024, 6:50 PM IST
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