Radheshyam Ganganagar came into limelight by defeating Bhairon Singh Shekhawat- जयपुर में उपचार के दौरान पूर्व मंत्री राधेश्याम का निधन, अंतिम विदाई कल
#Radheshyam Ganganagar पूर्व आयुर्वेद राज्य मंत्री राधेश्याम गंगानगर का शुक्रवार को सुबह जयपुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। अचानक तबीयत खराब होने पर उनको गुरुवार देर रात अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उनके बेटे वीरेंद्र राजपाल ने बताया कि शुक्रवार दोपहर बाद उनके पार्थिव शरीर को लेकर श्रीगंगानगर लाया जाएगा। शनिवार को सुबह 11 बजे अंतिम संस्कार कराया जाएगा। राधेश्याम गंगानगर वर्ष 1993 में भैरोंसिंह शेखावत को हराकर चर्चा में आए थे, तब शेखावत सीटिंग सीएम थे और उन्होंने गंगानगर विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर अपना भाग्य अजमाया लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी राधेश्याम गंगानगर ने उन्हें चित्त कर दिया। शेखावत का तीसरा स्थान रहा। वहीं वर्ष 1998 में राधेश्याम को गहलोत सरकार में आयुर्वेद राज्यमंत्री बने। कांग्रेस ने जब वर्ष 2008 में टिकट नहीं दिया तो उन्होंने कांग्रेस छोड भाजपा का दामन थामा और वे तब वे भाजपा से टिकट लेकर विधायक निर्वाचित हुए। लेकिन वर्ष 2013 के चुनाव में राधेश्याम को करारी हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2018 के चुनाव में भाजपा ने जब उनसे मुंह मोड़ा तो वे निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना भाग्य जमाया लेकिन सिर्फ 2300 वोटों में सिमट कर रह गए। वर्ष 2022 में राजनीति को अलविदा करते हुए अपने बेटे वीरेन्द्र राजपाल को उत्तराधिकारी बना दिया।
पाक विभाजन के बाद यहां आने के बाद अरोड़ा बिरादरी के प्रमुख पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर ने अपनी पहचान पूरे उत्तर भारत में बनाई। उनसे राजस्थान के अलावा पंजाब और हरियाणा के कई दिग्गज का सीधा संपर्क रहा हैं। राधेश्याम गंगानगर के चुनाव में नगर परिषद में सभापति के रूप में पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर रह चुके हैं। वे 20 जून 1972 से 13 जून 1972 तक और 4 नवम्बर 1972 से 5 सितम्बर 1973 तक सभापति के रूप में काम किया। इसी प्रकार यूआईटी में राधेश्याम गंगानगर 20 जून 1981 से 5 जून 1987 तक अध्यक्ष रहे।