
रायसिंहनगर (श्रीगंगानगर). करीब बीस साल पहले पति आसाराम का साथ छूट गया। इसके बाद 85 वर्षीय मीरां देवी की जिंदगी संघर्षों के सहारे चल रही है। परिवार में एक अविवाहित बेटा है, जो पढ़ा-लिखा नहीं है और बेरोजगार है। वह टीबी से पीड़ित है और उसका इलाज बीकानेर में चल रहा है। ऐसे में घर की जिम्मेदारी और बेटे के इलाज के बीच मीरां देवी के लिए जिंदगी चलाना लगातार मुश्किल होता गया। वृद्धावस्था पेंशन से मिलने वाली मामूली राशि ही परिवार के खर्च का मुख्य सहारा है।
इस मुश्किल जिंदगी के बीच उस समय उनकी परेशानी और बढ़ गई, जब जलदाय विभाग की ओर से उन्हें 79 हजार 755 रुपए का पानी का बिल थमा दिया गया। मीरां देवी के मुताबिक उनके घर में न पानी का नल है और न ही पानी की टंकी। रोजमर्रा की जरूरत के लिए वह पड़ोसियों के घर से पानी लाकर गुजारा करती है। ऐसे में इतना बड़ा बिल देखकर वह हैरान और परेशान है। मीरां देवी को यह भी पता नहीं कि बिल की शिकायत लेकर किस विभाग में जाएं और किस अधिकारी से अपनी बात कहें। उसने यह बिल पार्षद प्रतिनिधि योगेश बिश्नोई को दिखाते हुए अपनी परेशानी बताई। उसका कहना है कि जब घर में पानी का नल और टंकी तक नहीं है तो इतना बड़ा बिल कैसे आया, यह उनकी समझ से बाहर है।
मीरां देवी को उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस कनेक्शन मिला हुआ है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण सिलेंडर भरवाने के लिए पैसे जुटाना मुश्किल है। ऐसे में कनेक्शन होने के बावजूद उन्हें लकड़ी का चूल्हा जलाकर खाना बनाना पड़ता है। यह स्थिति बताती है कि सुविधा उपलब्ध होने के बाद भी नियमित खर्च उठाने की क्षमता नहीं होने पर उसका इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है।
जलदाय विभाग के बिल के अनुसार उनके पुत्र रुपराम पुत्र आशाराम के नाम से जारी बिल में 77 हजार 172 रुपए पुराना बकाया दर्ज है। इस पर 2,315 रुपए ब्याज और 170 रुपए आईडीसी शुल्क जोड़ा गया है, जबकि 665 रुपए की सरकारी छूट भी दी गई है। बिल में मीटर की रीडिंग औसत (एवरेज) के आधार पर दर्शाते हुए 51 किलोलीटर पानी की खपत मानी गई है। चालू माह का जल शुल्क 678 रुपए है। जबकि आसपास के लोगों का भी कहना है कि इस घर में दसकों से पानी कनेक्शन नहीं है।
संभवतः पूर्व में कनेक्शन हुआ होगा। बिना कनेक्शन बिल जारी होने का मामला ध्यान में नहीं है। प्रकरण की जांच करवाकर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा।
- इन्द्राज सिंह डागला, सहायक अभियंता जलदाय विभाग रायसिंहनगर।