
श्रीगंगानगर. जिले के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित गंगानगर मैराथन की हाफ मैराथन महिला वर्ग की विजेता संजना सिंह डोपिंग मामले को लेकर विवादों में घिर गई है। प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रही बाड़मेर की धाविका चतरू की शिकायत पर जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव की ओर से गठित जांच समिति ने तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। समिति ने संजना सिंह के विरुद्ध डोपिंग संबंधी मामला प्रमाणित पाए जाने के आधार पर उनका प्रथम स्थान निरस्त कर दिया है। इसके बाद प्रतियोगिता में दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर रही धाविकाओं की वरीयता बदल गई है।
जिला प्रशासन की ओर से जारी किए गए सूचना के अनुसार मैराथन की विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनके निस्तारण के लिए सीडीईओ अरविंदर सिंह की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई। समिति में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक वीरेन्द्रपाल सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय सिंगला और जिला खेल अधिकारी हरजिंदर सिंह को सदस्य बनाया गया।
गंगानगर स्थापना दिवस पर मैराथन को नशा मुक्त गंगानगर से जोड़कर माहौल बनाने बनाना था। डोपिंग प्रतिबंध की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद जिला प्रशासन बैकफुट पर नजर आया। स्थिति यह रही कि मैराथन के दौरान आयोजित अलग-अलग दौड़ों के परिणाम भी सार्वजनिक नहीं किए गए। आयोजन प्रभारी से लेकर खेलकूद अधिकारी तक इस मामले में स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। अधिकारियों ने एक-दूसरे को जिम्मेदार और अधिकृत बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
पांच किलोमीटर पुरुष वर्ग में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान को लेकर भी शिकायत की गई थी। समिति ने चिप टाइमिंग के आधार पर परिणामों की जांच की। जांच में निर्धारित परिणाम सही पाए जाने पर शिकायतकर्ता का दावा खारिज कर दिया गया। वहीं, 10 किलोमीटर दौड़ के परिणाम को लेकर भी एक शिकायत प्राप्त हुई है। इस मामले में समिति तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।
21 किमी हाफ मैराथन महिला वर्ग में तीसरे स्थान पर रही धाविका चतरू ने आरोप लगाया था कि रोहतक की संजना सिंह डोपिंग मामले में चार साल के प्रतिबंध के बावजूद प्रतियोगिता में शामिल हुईं और उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया। चतरू ने रविवार को मैराथन होने के उपरांत पुलिस लाइन में कार्यक्रम स्थल पर पुरस्कार वितरण के दौरान भी जिला कलक्टर के समक्ष यह मामला उठाते हुए जांच करवाने की मांग की थी। शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद जिला कलक्टर ने संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 48 घंटे का समय दिया था। इसके बाद प्रकरण की जांच समिति को सौंपी गई।