पंजाब की सीमा से सटे राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के साधुवाली गांव की इंदिरा ने बीते दो साल में खास मुकाम हासिल किया है।
श्रीगंगानगर। पंजाब की सीमा से सटे राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के साधुवाली गांव की इंदिरा ने बीते दो साल में खास मुकाम हासिल किया है। वह कभी स्कूल नहीं गई, लेकिन उनका उद्योग उन्हें सफलता के सोपान चढ़ा रहा है। उनके बनाए सॉफ्ट टॉयज की डिमांड विदेशों में हैं। आत्मनिर्भर बनने की उनकी यह यात्रा दो साल पहले ही शुरू हुई है, कोरोना काल में इंदिरा ने जिला परिषद से सॉफ्ट टॉयज मेकर एंड सेलर की ट्रेनिंग ली, उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करने की पहल की।
महिलाओं के साथ स्वयं सहायता समूह बनाए
इंदिरा ने अपने आसपास की महिलाओं के साथ स्वयं सहायता समूह बनाकर इस हुनर की धार तेज की। लुधियाना और नई दिल्ली से कच्चा माल मंगवाकर महिलाएं अपने घर में ही सॉफ्ट टॉयज तैयार कर रही हैं। इन महिलाओं के बनाए टेडी बियर और हाथी हाथों-हाथ बिक रहे हैं। मेलों के जरिए भी इनके बनाए सॉफ्ट टॉयज की बिक्री हो रही है।
गुणवत्ता पर फोकस किया
इंदिरा का कहना है कि मैंने हमेशा गुणवत्ता पर फोकस किया। हैंडीक्राफ्ट में तो रुचि हमेशा से ही थी, लेकिन इस हुनर को उद्योग में उतारने का तरीका ट्रेनिंग के बाद आया। महीने में 50 से 60 हजार रुपए आय होती है, गांव की महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार आया है। मैं तो कभी पढ़ नहीं पाई, लेकिन अपने बच्चों को पढ़ा रही हूं।