
Barmer-Rishikesh Express: श्रीगंगानगर/सूरतगढ़। धार्मिक यात्राओं और लंबी दूरी के सफर के लिए तीन राज्यों के हजारों यात्रियों की लाइफलाइन जोधपुर मंडल की ट्रेन संख्या 14888 बाड़मेर-ऋषिकेश एक्सप्रेस क्षमता से कई गुना अधिक यात्रीभार झेल रही है। राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के यात्रियों का मुख्य साधन होने के कारण इस ट्रेन में वर्षभर भारी भीड़ बनी रहती है। सीमित कोच संख्या और नई ट्रेन का संचालन नहीं होने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान में हालात यह है कि इस एकमात्र ट्रेन में आगामी दो माह तक सीटों का रिजर्वेशन पूरी तरह फुल चल रहा है और जून माह तक अधिकांश तिथियों में लंबी वेटिंग सूची दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार वर्तमान स्थिति में अप्रैल अंत से लेकर जून माह तक इस ट्रेन के स्लीपर श्रेणी में अधिकांश तिथियों पर 120 से 180 तक वेटिंग, जबकि थर्ड एसी में 40 से 70 तक वेटिंग चल रही है। जनरल कोचों की स्थिति और भी बदतर बनी हुई है, जहां यात्रियों को मजबूरी में खड़े होकर या टॉयलेट व सीढ़ियों के पास बैठकर यात्रा करनी पड़ती है।
गौरतलब है कि करीब 48 वर्ष पुरानी बाड़मेर-ऋषिकेश एक्सप्रेस का संचालन वर्ष 1978 में प्रारंभ किया गया था। बाद में इस ट्रेन में चंडीगढ़ के लिए लिंक जोड़ते जोड़ते हुए बाड़मेर-हरिद्वार-कालका लिंक एक्सप्रेस के रूप में संचालित किया गया। यह ट्रेन अंबाला से हरिद्वार और कालका के लिए विभाजित होकर चलती थी और चंडीगढ़ सहित कई प्रमुख शहरों से सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करती थी। ऋषिकेश के लिए सीट नहीं मिलने पर यात्री कालका लिंक कोचों में अंबाला तक रिजर्वेशन लेकर यात्रा करते थे। जहां अंबाला से बसों व अन्य ट्रेनों से ऋषिकेश पहुंचते थे। लेकिन कोविड के बाद रेलवे द्वारा कालका के लिए लिंक हटाने के बाद यात्रियों का दबाव पूरी तरह बाड़मेर-ऋषिकेश एक्सप्रेस पर आ गया है।
मौजूदा ट्रेन पर यात्रीभार और श्रद्धालु गंगा स्नान, हरिद्वार-ऋषिकेश दर्शन और पितृ तर्पण के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में सीमित कोच संख्या के कारण यात्रियों को समय पर रिजर्वेशन नहीं मिल पाता और बेहद कष्ट भरी परिस्थितियों में यात्रा करनी पड़ती है। यात्रियों का कहना है कि पंजाब में प्रवेश करते ही ट्रेन के स्लीपर और एसी कोच भी जनरल जैसे हो जाते हैं। भारी भीड़ के कारण बिना टिकट यात्री भी कोचों में घुस जाते हैं, जिससे रिजर्वेशन कराने वाले यात्रियों को भी सीट नहीं मिल पाती और यात्रा बेहद कष्टदायक हो जाती है।
बाड़मेर-ऋषिकेश ट्रेन में कोच की कमी और अत्यधिक यात्रीभार के चलते यात्रियों को रिजर्वेशन लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस कारण यात्री ट्रेन में भेड़-बकरियों की तरह यात्रा करने पर मजबूर हैं। रेलवे प्रशासन द्वारा नई ट्रेन चलाने पर ही यात्रियों को राहत मिलना संभव है।
-लक्ष्मण शर्मा, संयोजक, नागरिक संघर्ष समिति रेल, सूरतगढ़।
ऋषिकेश में महज 16 कोच का प्लेटफार्म होने के कारण फिलहाल बाड़मेर-ऋषिकेश ट्रेन में कोच बढ़ाना संभव नहीं है। बीकानेर से हरिद्वार के लिए नई ट्रेन चलाने को लेकर उत्तर-पश्चिम रेल मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
-भूपेश यादव, सीनियर डीसीएम, बीकानेर रेल मंडल।
Published on:
27 Apr 2026 02:33 pm
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